पब्लिक स्वर,अभनपुर/महासमुंद। महासमुंद जिले में करोड़ों रुपये की एलपीजी गैस हेराफेरी मामले में पब्लिक स्वर के लगातार खुलासों और स्टिंग ऑपरेशन के बाद अब पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। मामले के मुख्य आरोपी संतोष सिंह ठाकुर और उसके बेटे सार्थक सिंह ठाकुर को महाराष्ट्र के कोल्हापुर से गिरफ्तार किया गया है। दोनों आरोपी घटना के बाद से फरार चल रहे थे और अलग-अलग शहरों में ठिकाने बदलकर पुलिस से बचने की कोशिश कर रहे थे।
गौरतलब है कि पब्लिक स्वर ने इस पूरे मामले को शुरू से प्रमुखता से उठाया था। समाचार पत्र द्वारा लगातार खबरें प्रकाशित की गईं और कथित गड़बड़ी से जुड़ा स्टिंग ऑपरेशन वीडियो भी सामने लाया गया, जिसके बाद प्रशासन और पुलिस की जांच तेज हुई। अब मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी को मामले में बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है।
पुलिस अधीक्षक प्रभात कुमार ने प्रेसवार्ता में बताया कि सिंघोड़ा थाना में दर्ज एलपीजी गैस गबन मामले में फरार आरोपी लगातार रायपुर, कवर्धा, छुईखदान, कान्हा-किसली, कोलकाता, पुणे, मुंबई और कोल्हापुर जैसे शहरों में ठिकाने बदल रहे थे। उनकी तलाश के लिए महासमुंद पुलिस की कई टीमें गठित की गई थीं।
सैकड़ों सीसीटीवी फुटेज, टोल प्लाजा डेटा और तकनीकी विश्लेषण के आधार पर पुलिस को सूचना मिली कि दोनों आरोपी महाराष्ट्र के कोल्हापुर स्थित न्यू चालुक्य होटल में छिपे हुए हैं। इसके बाद स्थानीय पुलिस के सहयोग से दबिश देकर शांति विहार कॉलोनी, डगनिया, थाना डीडी नगर रायपुर निवासी संतोष सिंह ठाकुर (57) और उसके पुत्र सार्थक सिंह ठाकुर (27) को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने संतोष ठाकुर के कब्जे से 20 हजार रुपये नकद भी जब्त किए हैं।
87 टन एलपीजी गैस की हेराफेरी
एसपी प्रभात कुमार ने बताया कि सिंघोड़ा थाना में दर्ज अपराध क्रमांक 96/25 के तहत 24 दिसंबर 2025 को 6 एलपीजी गैस से भरे कैप्सूल ट्रकों को जब्त किया गया था। भीषण गर्मी और सुरक्षा कारणों को देखते हुए जिला प्रशासन के निर्देश पर 30 मार्च 2026 को खाद्य विभाग की मौजूदगी में इन वाहनों को ठाकुर पेट्रो केमिकल्स, उरला रायपुर के संचालक संतोष सिंह ठाकुर के सुपुर्द किया गया था।
जांच में सामने आया कि सुपुर्द किए गए 6 ट्रकों में से 5 कैप्सूल ट्रकों में भरी करीब 87 टन एलपीजी गैस की हेराफेरी कर दी गई। पुलिस के मुताबिक गैस की अनुमानित कीमत करीब 77 लाख रुपये है। मामले में आपराधिक न्यास भंग, कूट रचना और कालाबाजारी जैसी गंभीर धाराओं के तहत अपराध दर्ज किया गया है।
पूछताछ में करोड़ों की डील का खुलासा
पुलिस पूछताछ में मुख्य आरोपी संतोष ठाकुर ने बताया कि इस मामले में 1 करोड़ 30 लाख रुपये की मांग की गई थी, लेकिन बाद में 90 लाख रुपये में सौदा तय हुआ। आरोपी के अनुसार पहली किश्त में 45 लाख और दूसरी किश्त में 15 लाख रुपये दिए गए थे। इसके अलावा 30 लाख रुपये ऑनलाइन सिक्योरिटी के तौर पर ट्रांसफर किए गए थे। बाद में नकद भुगतान होने पर ऑनलाइन ट्रांसफर की गई राशि वापस हो गई। पुलिस अब इस आर्थिक लेन-देन और इसमें शामिल अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।
जिला खाद्य अधिकारी समेत चार आरोपी पहले ही गिरफ्तार
इस हाई-प्रोफाइल मामले में पुलिस पहले ही जिला खाद्य अधिकारी अजय यादव, पंकज चंद्राकर, मनीष चौधरी और निखिल वैष्णव को गिरफ्तार कर चुकी है। अब मुख्य आरोपी पिता-पुत्र की गिरफ्तारी के बाद पुलिस को पूरे नेटवर्क और संभावित मिलीभगत से जुड़े और बड़े खुलासों की उम्मीद है।

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