पब्लिक स्वर,रायपुर। नवा रायपुर को देश के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों से जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR) ने बहुप्रतीक्षित नवा रायपुर-खरसिया-परमालकसा नई रेल लाइन परियोजना के तहत रायपुर जिले में आने वाली जमीनों की सूची जारी कर दी है। इसके साथ ही जमीन अधिग्रहण की प्रारंभिक प्रक्रिया भी शुरू हो गई है।
रेलवे प्रशासन ने प्रभावित जमीन मालिकों को दावा और आपत्ति दर्ज कराने के लिए 30 दिन का समय दिया है। इस परियोजना को केंद्र सरकार की प्राथमिकता वाली रेलवे योजनाओं में शामिल किया गया है और इसे भविष्य की औद्योगिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विकसित किया जा रहा है।
154 हेक्टेयर में फैली है परियोजना
दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे बिलासपुर के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी मुदित भटनागर के अनुसार, पूरी रेल परियोजना लगभग 154 हेक्टेयर क्षेत्र में फैली हुई है। पहले चरण में रायपुर जिले के भीतर करीब 12.95 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहित की जाएगी।
रेलवे द्वारा जारी अधिसूचना में मंदिर हसौद क्षेत्र के कई गांवों को शामिल किया गया है। इनमें धमनी, गुजरा, गनौद, रींवा, टेकारी, नारा, डिघारी और खौली जैसे गांव प्रमुख हैं। इन गांवों के प्रभावित किसानों और जमीन मालिकों से तय समय के भीतर दावा और आपत्ति प्रस्तुत करने को कहा गया है।
केंद्र सरकार की प्राथमिकता वाली परियोजना
यह परियोजना राष्ट्रीय स्तर पर भी अहम मानी जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अप्रैल 2025 में जिन चार मल्टी-ट्रैकिंग रेलवे परियोजनाओं को मंजूरी दी थी, उनमें नवा रायपुर-खरसिया-परमालकसा रेल लाइन भी शामिल थी। रेलवे सूत्रों के मुताबिक यह परियोजना केवल नई रेल लाइन नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के औद्योगिक और लॉजिस्टिक नेटवर्क को मजबूत करने की रणनीतिक पहल है।
इंडस्ट्री को मिलेगा सीधा फायदा
नई रेल लाइन बनने के बाद नवा रायपुर की सीधी रेल कनेक्टिविटी रायगढ़, राजनांदगांव और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों से मजबूत होगी। इससे माल ढुलाई की प्रक्रिया तेज और कम खर्चीली होने की उम्मीद है। विशेष रूप से बलौदाबाजार क्षेत्र के सीमेंट प्लांट, स्टील यूनिट और भारी उद्योगों को इसका बड़ा लाभ मिल सकता है। अभी माल परिवहन के लिए सड़क और मौजूदा रेल नेटवर्क पर काफी दबाव रहता है। नई लाइन शुरू होने के बाद उद्योगों को वैकल्पिक और तेज परिवहन मार्ग मिलेगा।
रेलवे नेटवर्क पर कम होगा दबाव
दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के अधिकारियों के अनुसार, इस परियोजना को रेलवे की पांचवीं और छठवीं लाइन के रूप में विकसित किया जाएगा। वर्तमान में रायपुर-बिलासपुर और आसपास के रूट देश के सबसे व्यस्त रेल कॉरिडोर में गिने जाते हैं। ऐसे में नई लाइन बनने से मौजूदा नेटवर्क पर ट्रैफिक का दबाव कम होगा। इसके अलावा, नई राजधानी नवा रायपुर की रेल पहुंच भी पहले से अधिक मजबूत होगी, जिससे भविष्य में यात्री और माल परिवहन दोनों को फायदा मिलेगा।
नवा रायपुर के विस्तार को मिलेगी गति
फिलहाल नवा रायपुर को राजिम रेल कॉरिडोर से जोड़ने की योजना पर भी काम चल रहा है। ऐसे में खरसिया दिशा की नई रेल लाइन राजधानी क्षेत्र के बहुआयामी विस्तार को और गति दे सकती है।

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