पब्लिक स्वर,रायपुर। छत्तीसगढ़ में विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की शिक्षा व्यवस्था को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने राज्य शासन को बड़ा निर्देश दिया है। सर्वोच्च न्यायालय ने विशेष शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया में तेजी लाने और पात्र अभ्यर्थियों की नियुक्ति दो माह के भीतर पूर्ण करने के आदेश दिए हैं। यह निर्देश “राजनीश कुमार पांडेय एवं अन्य बनाम भारत संघ एवं अन्य” मामले की सुनवाई के दौरान जारी किया गया। न्यायालय ने राज्य में विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की शिक्षा को गंभीर विषय मानते हुए समावेशी शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया।
याचिकाकर्ताओं की ओर से सुप्रीम कोर्ट में एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड कौस्तुभ शुक्ला एवं अधिवक्ता पलाश तिवारी ने पक्ष रखा। वहीं कौस्तुभ शुक्ला ने छत्तीसगढ़ आरसीआई टीचर एसोसिएशन की ओर से लंबित मामले में हस्तक्षेप आवेदन भी पेश किया।
848 स्वीकृत पदों में अब भी कई रिक्त
सुनवाई के दौरान छत्तीसगढ़ शासन ने हलफनामा प्रस्तुत कर बताया कि राज्य में विशेष शिक्षकों के कुल 848 पद स्वीकृत हैं। इनमें से 100 पदों पर भर्ती के लिए 3 अक्टूबर 2025 को विज्ञापन जारी किया गया था। भर्ती प्रक्रिया के तहत भारतीय पुनर्वास परिषद (RCI) की अर्हता रखने वाले 62 शिक्षकों की नियुक्ति की जा चुकी है, जबकि 38 पद टीईटी संबंधी कारणों से रिक्त हैं।
155 BRP और 85 विशेष शिक्षकों को मौका
याचिकाकर्ताओं की ओर से कोर्ट को बताया गया कि वर्तमान में प्राथमिक स्तर पर 155 ब्लॉक रिसोर्स पर्सन (BRP) संविदा आधार पर कार्यरत हैं, जबकि माध्यमिक स्तर पर 85 विशेष शिक्षक निश्चित मानदेय पर सेवाएं दे रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि इन सभी अभ्यर्थियों को उनके शैक्षणिक एवं व्यावसायिक दस्तावेजों सहित स्क्रीनिंग कमेटी के समक्ष प्रस्तुत होने का अवसर दिया जाए। यदि वे आरसीआई द्वारा निर्धारित योग्यता एवं अन्य पात्रताएं पूरी करते हैं, तो उनकी नियुक्ति पर विधिसम्मत विचार किया जाए।
जुलाई 2026 में देनी होगी अनुपालन रिपोर्ट
कोर्ट ने राज्य शासन को निर्देशित किया कि पात्र पाए गए अभ्यर्थियों की नियुक्ति प्रक्रिया यथासंभव दो माह के भीतर पूरी की जाए और इसकी अनुपालन रिपोर्ट जुलाई 2026 में न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत की जाए।
49 हजार बच्चों के लिए 3981 विशेष शिक्षकों की जरूरत
अपने आदेश में सुप्रीम Court ने यह भी उल्लेख किया कि छत्तीसगढ़ में 49 हजार से अधिक विशेष आवश्यकता वाले बच्चे हैं, जबकि राज्य में करीब 3981 विशेष शिक्षकों की आवश्यकता है। न्यायालय ने कहा कि विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को गुणवत्तापूर्ण और समावेशी शिक्षा उपलब्ध कराना राज्य की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।

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