पब्लिक स्वर,रायपुर/दिल्ली। अभी कुछ देर पहले आपके मोबाइल फोन पर अचानक तेज आवाज के साथ इमरजेंसी अलर्ट आया है, तो इसे किसी खतरे का संकेत समझने की जरूरत नहीं है। यह दरअसल भारत सरकार द्वारा चलाए जा रहे एक महत्वपूर्ण सुरक्षा परीक्षण का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य भविष्य में आपदा के समय लोगों तक तुरंत और प्रभावी तरीके से सूचना पहुंचाना है।
यह अलर्ट दूरसंचार विभाग (DoT) और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) द्वारा संयुक्त रूप से विकसित सेल ब्रॉडकास्ट सिस्टम (Cell Broadcast System) की टेस्टिंग के तहत भेजा गया। इस तकनीक का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि प्राकृतिक या मानव-जनित आपदाओं के दौरान लोगों को समय रहते चेतावनी दी जा सके।
क्यों जरूरी है यह सिस्टम?
अब तक आपदा से जुड़ी सूचनाएं मुख्य रूप से SMS के जरिए भेजी जाती थीं। हालांकि, SMS सिस्टम में कुछ सीमाएं हैं—जैसे नेटवर्क पर दबाव बढ़ने पर मैसेज का देर से पहुंचना या कई बार न पहुंच पाना। ऐसे मामलों में जहां हर सेकंड की अहमियत होती है—जैसे बिजली गिरना, सुनामी, भूकंप, गैस रिसाव या फ्लैश फ्लड—वहां पारंपरिक SMS सिस्टम पर्याप्त नहीं माना जाता।
क्या है सेल ब्रॉडकास्ट टेक्नोलॉजी?
सेल ब्रॉडकास्ट एक अत्याधुनिक तकनीक है, जो किसी विशेष भौगोलिक क्षेत्र में मौजूद सभी मोबाइल फोन पर एक साथ अलर्ट भेजने में सक्षम है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह संदेश सीधे मोबाइल टावर से प्रसारित होता है, जिससे यह तेजी से और बिना देरी के लोगों तक पहुंचता है। एक साथ हजारों-लाखों यूजर्स तक अलर्ट, नेटवर्क कंजेशन का असर नहीं, कम सिग्नल में भी संदेश प्राप्त, क्षेत्र-विशिष्ट (location-based) अलर्ट
इस तकनीक को भारत में C-DOT (सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ टेलीमैटिक्स) ने स्वदेशी रूप से विकसित किया है, जो देश की डिजिटल और आपदा प्रबंधन क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
जनता के लिए क्या मायने?
सरकार समय-समय पर ऐसे टेस्ट अलर्ट भेजकर यह परख रही है कि सिस्टम वास्तविक परिस्थितियों में कितना कारगर है। साथ ही, यह नागरिकों को भी जागरूक करने का एक तरीका है, ताकि वे ऐसे अलर्ट को पहचान सकें और आपात स्थिति में सही प्रतिक्रिया दे सकें।

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