सर्वोदय स्कूल संचालक के फैसले से 50 से अधिक विद्यार्थियों का भविष्य अधर में,निर्धन वर्ग के छात्र हो रहे प्रभावित



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रिपोर्ट - राजेश रात्रे 


पब्लिक स्वर धमतरी - सर्वोदय स्कूल भखारा में RTE के तहत प्रवेशित विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा।अचानक सर्वोदय स्कूल में बच्चों को स्थानांतरण प्रमाण पत्र देकर गरीब बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ किया जा रहा है।जिससे पालकों में भारी आक्रोशित है।
             
उल्लेखनीय है कि गरीब तबके के बच्चों को गुणवत्तायुक्त शिक्षा मुहैय्या करवाने के लिए तत्कालीन केंद्र सरकार ने निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा अधिनियम 2009 पारित किया था जो पूरे भारत में 1 अप्रैल 2010 से लागू हुआ था।यह कानून भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21A के तहत 6 से 14 वर्ष तक के सभी बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा प्रदान करता है।इसके तहत निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों में आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्ग के बच्चों के लिए 25% सीटें आरक्षित होती हैं।
             
पालकों ने बताया कि सर्वोदय हिन्दी मीडियम/अंग्रेजी मीडियम स्कूल भखारा में 2017 से संचालित था।उक्त स्कूल के संचालक तिहारू राम सिन्हा ने अचानक स्कूल बंद कर दिया है।जिससे अब वहां RTE के तहत अध्ययनरत बच्चों की बेहतर शिक्षा पास संकट के काले बादल दिखाई दे रहे है।


शिक्षा विभाग के आंखों में धूल झोंक RTE के तहत बेतहाशा एडमिशन 


पालकों ने आरोप लग है कि सर्वोदय स्कूल के संचालक तिहारू राम सिन्हा ने शिक्षा विभाग को एंट्री कक्षाओं की क्षमता से अधिक फर्जी जानकारी देकर आर्थिक लाभ लेने हेतु ज्यादा से ज्यादा बच्चों को एडमिशन दिया एवं पिछले नौ सालों से शिक्षा विभाग के कोश में सेंधमारी की है।


पुस्तक,यूनिफार्म के पैसे डकारने का भी है आरोप

RTE प्रवेशित विद्यार्थियों के पालकों ने बताया कि पिछले कई वर्षों से उन्हें पुस्तक एवं गणवेश के लिए मिलने वाली राशि का भुगतान भी संस्था के द्वारा नहीं किया गया है।अब अचानक से टीसी जारी कर बच्चों के अधिकारों पर डाका डाला जा रहा है।


एक हफ्ते के भीतर टीसी ले जाने का पालकों पर दबाव

सर्वोदय स्कूल भखारा के साथ साथ धमतरी में भी संचालित है।स्कूल संचालक ने पलकों को फरमान जारी कर कह दिया है।एक हफ्ते के भीतर भखारा कार्यालय से टीसी प्राप्त कर ले अन्यथा धमतरी का चक्कर लगाने पड़ेंगे।संचालक के फरमान से सभी पालक अचरज में है।उन्हें कुछ समझ नहीं आ रहा है।

जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय घेराव की सहमति

पालकों ने बताया कि RTE के तहत मिलने वाली राशि भी उन्हें प्राप्त नहीं हुआ है।अब ऐसे में पालक सड़क पर उतर कर स्कूल संचालक के खिलाफ मोर्चा खोलने मजबूर है।पालकों ने स्पष्ट कह दिया है कि यदि एक हफ्ते के भीतर RTE के तहत मिलने वाली राशि उन्हें प्राप्त नहीं हुआ और उनके बच्चों का एडमिशन दूसरे निजी शाला में RTE के तहत नहीं हुआ तो स्कूल संचालक का पुतला फूंक कर जिला शिक्षा अधिकारी के कार्यालय घेराव करने के अलावा को दूसरा रास्ता नहीं है।सभी पालक सड़क पर उतरकर स्कूल संचालक का पुतला फूंककर जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय का घेराव करेंगे।



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