पब्लिक स्वर,धमतरी। छत्रपति शिवाजी महाराज के राज्याभिषेक दिवस पर शनिवार को धमतरी में श्रद्धा, आस्था और गौरव का वातावरण देखने को मिला। रत्नाबांधा रोड स्थित छत्रपति शिवाजी चौक पर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच शिवाजी महाराज की प्रतिमा का सात पवित्र नदियों के जल से अभिषेक किया गया। कार्यक्रम में मराठा समाज, जनप्रतिनिधियों और बड़ी संख्या में नागरिकों ने भाग लेकर महाराज को श्रद्धांजलि अर्पित की।
राज्याभिषेक समिति द्वारा आयोजित कार्यक्रम की शुरुआत विधिवत पूजा-अर्चना और वैदिक अनुष्ठान से हुई। इसके बाद सात पवित्र नदियों के जल से प्रतिमा का अभिषेक किया गया। धमतरी नगर निगम के महापौर रामू रोहरा ने प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। इस दौरान "जय भवानी, जय शिवाजी" के जयघोष से पूरा परिसर गूंज उठा।
मराठा समाज के अध्यक्ष दीपक लोंढे ने बताया कि छत्रपति शिवाजी महाराज का ऐतिहासिक राज्याभिषेक वर्ष 1674 में रायगढ़ किले में हुआ था। वैदिक परंपरा के अनुसार उनका अभिषेक सात पवित्र नदियों के जल से किया गया था और उन्हें हिंदू सम्राट के रूप में प्रतिष्ठित किया गया। यह राज्याभिषेक केवल एक शासक के सिंहासनारोहण का समारोह नहीं था, बल्कि स्वराज की अवधारणा को औपचारिक स्वरूप देने वाला ऐतिहासिक क्षण माना जाता है। दीपक लोंढे ने कहा कि राज्याभिषेक उत्सव का उद्देश्य शिवाजी महाराज के राष्ट्र, समाज और सुशासन के आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाना तथा समाज को एक सूत्र में जोड़ना है।
राज्याभिषेक समिति के विश्वजीत कृदत्त ने कहा कि यह आयोजन परंपरा निभाने तक सीमित नहीं है, बल्कि नई पीढ़ी को छत्रपति शिवाजी महाराज के साहस, नेतृत्व, राष्ट्रभक्ति और स्वाभिमान से परिचित कराने का माध्यम भी है। उन्होंने बताया कि ज्येष्ठ मास की त्रयोदशी के दिन हुए इस ऐतिहासिक राज्याभिषेक ने भारतीय इतिहास में स्वराज की स्थापना के संकल्प को नई पहचान दी, जिसकी स्मृति में प्रतिवर्ष यह उत्सव मनाया जाता है।
महापौर रामू रोहरा ने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज भारतीय इतिहास के उन महानायकों में हैं, जिन्होंने साहस, सुशासन, राष्ट्रभक्ति और सांस्कृतिक अस्मिता की रक्षा का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया। उनका जीवन आज भी युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने युवाओं से शिवाजी महाराज के आदर्शों से प्रेरणा लेकर राष्ट्र सेवा, समाज सेवा और भारतीय संस्कृति के संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के दौरान मराठा समाज के सदस्यों, महिलाओं और नागरिकों ने श्रद्धापूर्वक सहभागिता निभाई। आयोजन का समापन शिवाजी महाराज के आदर्शों पर चलने और सामाजिक एकता को मजबूत करने के संकल्प के साथ हुआ।

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