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छत्तीसगढ़ की स्वास्थ्य व्यवस्था पर AAP का हमला, स्वास्थ्य मंत्री के इस्तीफे की मांग



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पब्लिक स्वर,रायपुर। छत्तीसगढ़ की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर आम आदमी पार्टी (AAP) ने राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पार्टी का दावा है कि एक ओर सरकारी अस्पतालों की पैथोलॉजी लैब का संचालन निजी एजेंसी को सौंपा जा रहा है, वहीं दूसरी ओर विभाग ने करीब 10 करोड़ रुपये के रीजेंट (रक्त जांच में उपयोग होने वाले रसायन) की खरीदी की है। AAP ने इस खरीद प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच कराने और स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल से इस्तीफे की मांग की है।

शनिवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में पार्टी के मुख्य प्रवक्ता सूरज उपाध्याय, कर्मचारी विंग के प्रदेश अध्यक्ष विजय कुमार झा और प्रदेश उपाध्यक्ष नंदन सिंह ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर कई सवाल उठाए। उनका आरोप है कि सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के बजाय उन्हें धीरे-धीरे निजी हाथों में सौंप रही है।

रीजेंट खरीदी पर उठाए सवाल

AAP नेताओं ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग ने इसी महीने से सरकारी अस्पतालों की पैथोलॉजी लैब का संचालन सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी HLL को सौंपना शुरू किया है। कंपनी को पांच वर्षों का ठेका दिया गया है और नई जांच मशीनें भी स्थापित की जानी हैं। पार्टी ने सवाल किया कि जब विभाग को पहले से जानकारी थी कि नई एजेंसी अपनी मशीनों और संसाधनों के साथ काम करेगी, तो फिर पुराने सिस्टम के लिए करीब 10 करोड़ रुपये के रीजेंट खरीदने की आवश्यकता क्यों पड़ी? AAP का आरोप है कि इस खरीद में अनियमितता और अधिकारियों की मिलीभगत की आशंका है, जिसकी स्वतंत्र जांच कराई जानी चाहिए।

"हमर लैब" बंद होने की आशंका

प्रेस कॉन्फ्रेंस में AAP ने यह भी दावा किया कि जिला अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में संचालित "हमर लैब" को आने वाले महीनों में बंद करने की तैयारी की जा रही है। पार्टी का कहना है कि यदि ऐसा हुआ तो ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के मरीजों को समय पर जांच सुविधाएं नहीं मिल पाएंगी और उन्हें निजी लैब या बड़े शहरों के अस्पतालों पर निर्भर होना पड़ेगा।

700 बेड के नए अस्पताल भवन में देरी पर भी सवाल

AAP ने राजधानी रायपुर स्थित डॉ. भीमराव अंबेडकर स्मृति चिकित्सालय में प्रस्तावित 700 बिस्तरों वाले नए अस्पताल भवन के निर्माण में हो रही देरी को भी सरकार की बड़ी विफलता बताया। नेताओं के अनुसार, करीब 231 करोड़ रुपये की लागत से छह मंजिला आधुनिक अस्पताल भवन बनाने की घोषणा लगभग दो वर्ष पहले की गई थी, लेकिन अब तक टेंडर प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है। उनका कहना है कि प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में पहले से ही मरीजों का भारी दबाव है और बेड की कमी के कारण लोगों को इलाज के लिए इंतजार करना पड़ रहा है।

AAP की प्रमुख मांगें

पार्टी ने सरकार के सामने कई मांगें रखीं—

10 करोड़ रुपये की रीजेंट खरीदी की निष्पक्ष जांच कराई जाए।

700 बेड वाले नए अस्पताल भवन का टेंडर तत्काल जारी कर निर्माण शुरू किया जाए।

टेंडर प्रक्रिया में देरी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई हो।

अंबेडकर अस्पताल में बेड क्षमता और स्वास्थ्य सुविधाएं बढ़ाई जाएं।

"हमर लैब" को बंद नहीं किया जाए।

स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल से इस्तीफा लिया जाए। AAP नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने इन मुद्दों पर जल्द कार्रवाई नहीं की, तो पार्टी पूरे प्रदेश में आंदोलन शुरू करेगी।



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