30 साल से सड़क का इंतज़ार: कोटिगुड़ा के आदिवासियों ने प्रधानमंत्री मोदी से लगाई विकास की गुहार

4 किमी कच्चे रास्ते ने रोकी जिंदगी की रफ्तार, बारिश में दुनिया से कट जाता है गांव



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पब्लिक स्वर,सुकमा। बस्तर के सुदूर आदिवासी अंचल में बसे कोटिगुड़ा गांव के सैकड़ों ग्रामीणों ने आखिरकार अपनी 30 साल पुरानी पीड़ा देश के प्रधानमंत्री तक पहुंचा दी है। गांव के 450 से 500 आदिवासी परिवारों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर गांव तक ऑल-वेदर सड़क, सीसी रोड, स्ट्रीट लाइट और राशन व्यवस्था जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है।

प्रधानमंत्री कार्यालय में दर्ज शिकायत क्रमांक PMOPG/E/2026/0083126 में ग्रामीणों ने बताया कि सुकमा मुख्यालय से गांव तक केवल 4 किलोमीटर का कच्चा और ऊबड़-खाबड़ रास्ता है, जो बारिश के दिनों में पूरी तरह बंद हो जाता है। झाड़ियों, पत्थरों और कीचड़ से भरे इस रास्ते ने ग्रामीणों की जिंदगी को वर्षों से मुश्किल बना रखा है।

ग्रामीणों के अनुसार गांव में आज तक पक्की सड़क नहीं बन सकी। स्वास्थ्य आपातकाल के समय एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच पाती, जिससे कई बार गंभीर हादसे और परेशानियां सामने आ चुकी हैं। शिक्षक, छात्र, व्यापारी और मजदूर रोजाना इसी खतरनाक रास्ते से आवाजाही करने को मजबूर हैं।

बारिश के मौसम में हालात और भी भयावह हो जाते हैं, जब पूरा गांव बाहरी दुनिया से कट जाता है। ग्रामीणों को राशन, हाट-बाजार और सरकारी कामों के लिए जंगल के रास्तों से पैदल सुकमा जाना पड़ता है।

ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि गांव में राशन वितरण सोसाइटी की बिल्डिंग तो बनाई गई, लेकिन आज तक वहां राशन वितरण शुरू नहीं हो सका। मजबूरी में ग्रामीणों को सुकमा मुख्यालय से सामान लाना पड़ता है।
शिकायत में ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि जब सुकमा जिले की अधिकांश आबादी आदिवासी है और जनप्रतिनिधि भी आदिवासी समुदाय से आते हैं, तब भी कोटिगुड़ा जैसे गांव विकास से क्यों वंचित हैं। ग्रामीणों ने तीखा सवाल करते हुए कहा— “क्या नेता सिर्फ चुनाव के समय ही गांवों को याद करते हैं?”

ग्रामीणों की प्रमुख मांगें

सुकमा से कोटिगुड़ा तक 4 किमी ऑल-वेदर सड़क निर्माण।
गांव की गलियों में सीसी रोड।
स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था।
राशन सोसाइटी को तत्काल चालू करना।
निर्माण कार्य की जियो-टैग्ड फोटो और वीडियो के साथ पारदर्शी मॉनिटरिंग।

ग्रामीणों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सीधे हस्तक्षेप और स्थलीय जांच की मांग करते हुए कहा कि उन्हें “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास” के नारे पर भरोसा है और उम्मीद है कि अब उनका गांव भी विकास की मुख्यधारा से जुड़ सकेगा।

गौरतलब है कि नक्सल प्रभावित बस्तर क्षेत्र में पिछले वर्षों में सड़क और बुनियादी ढांचे के विकास पर सरकार ने कई योजनाएं चलाई हैं, लेकिन कोटिगुड़ा जैसे कई छोटे गांव आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। अब सबकी नजर प्रशासन और लोक निर्माण विभाग की कार्रवाई पर टिकी है।



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