पब्लिक स्वर,बिलासपुर। शहर के कुदुदंड क्षेत्र में सड़क निर्माण परियोजना के लिए अवैध मकानों को हटाने की कार्रवाई के दौरान शुक्रवार को विवाद की स्थिति बन गई। नगर निगम की टीम जब लोगों को शिफ्ट कराने पहुंची, तो रहवासियों ने विरोध शुरू कर दिया। इस दौरान एक युवती ने निगम कर्मी पर अपनी मां को धक्का देने और पुलिसकर्मी पर धमकाने का आरोप लगाया, जिससे मौके पर काफी देर तक तनाव का माहौल बना रहा।
दरअसल, शिवघाट बैराज से नदी किनारे तक प्रस्तावित सड़क निर्माण के लिए सरकारी जमीन पर बने 46 अवैध मकानों को हटाया जाना है। प्रशासन की ओर से इन परिवारों को कोनी स्थित आईएचएसडीपी आवास में बसाने की प्रक्रिया पिछले कई महीनों से चल रही है, लेकिन अधिकांश लोग वहां जाने को तैयार नहीं हैं।
“कोनी नहीं, उसलापुर में चाहिए आवास”
कुदुदंड में वर्षों से रह रहे लोगों का कहना है कि वे कोनी स्थित आवास में शिफ्ट नहीं होना चाहते। उनकी मांग है कि उन्हें उसलापुर में निर्माणाधीन प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बन रहे गिरधर आवास में बसाया जाए। इसी मांग को लेकर निगम अमले और स्थानीय रहवासियों के बीच तीखी बहस हुई।
जब निगम की टीम दोपहर में लोगों को शिफ्ट कराने पहुंची, तब कई परिवारों ने स्पष्ट रूप से कोनी जाने से इनकार कर दिया। रहवासियों का कहना था कि शहर से दूर कोनी में बसने से उनके रोजगार और बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होगी, जबकि उसलापुर अपेक्षाकृत बेहतर विकल्प है।
निगम का दावा— पात्रता के आधार पर हुआ आवंटन
नगर निगम की सब इंजीनियर वर्षा साहू ने बताया कि 46 प्रभावित परिवारों में से 36 लोगों को लॉटरी प्रक्रिया के माध्यम से कोनी स्थित आईएचएसडीपी आवास आवंटित किए जा चुके हैं। इसके बावजूद कई लोग शिफ्ट होने में आनाकानी कर रहे हैं।
उन्होंने बताया कि अब तक 6 से 7 परिवारों को कुदुदंड से कोनी स्थानांतरित भी किया जा चुका है। साहू के मुताबिक, कुदुदंड के अधिकांश लोग प्रधानमंत्री आवास योजना की पात्रता शर्तों को पूरा नहीं करते, इसलिए उन्हें उसलापुर स्थित पीएम आवास नहीं दिया जा सकता। साथ ही वह आवास अभी निर्माणाधीन भी है।
उन्होंने जानकारी दी कि कोनी स्थित आईएचएसडीपी आवास के लिए हितग्राही अंशदान 33 हजार रुपए तय है, जबकि उसलापुर पीएम आवास के लिए यह राशि करीब 75 हजार रुपए है। पात्रता और योजना के नियमों के अनुसार ही आवासों का आवंटन किया गया है।
6.40 करोड़ की सड़क परियोजना
जल संसाधन विभाग के कार्यपालन अभियंता (ईई) ने बताया कि शिवघाट बैराज के दोनों ओर नदी किनारे करीब 650 मीटर लंबी सड़क निर्माण परियोजना के लिए 6.40 करोड़ रुपए का वर्क ऑर्डर जारी किया गया है। उन्होंने कहा कि सड़क निर्माण के लिए सरकारी जमीन खाली कराना जरूरी है। इसी संबंध में विभाग की ओर से नगर निगम को पत्र लिखकर अतिक्रमण हटाने का अनुरोध किया गया था। जमीन खाली होने के बाद निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा।
शहर से सीधे जुड़ेंगे तटवर्ती गांव
अधिकारियों के अनुसार, सड़क बनने के बाद अरपा नदी किनारे बसे कुदुदंड समेत आसपास के तटवर्ती गांवों का शहर से सीधा संपर्क स्थापित होगा। इससे हजारों लोगों को बेहतर आवागमन सुविधा मिलेगी और भविष्य में नदी किनारे यातायात और विकास की नई संभावनाएं भी खुलेंगी। हालांकि, विकास परियोजना और पुनर्वास के बीच फंसे कुदुदंड के रहवासियों की नाराजगी फिलहाल प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है।

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