पब्लिक स्वर,राजनांदगांव/महाराष्ट्र। महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले में नक्सल विरोधी अभियान के तहत पुलिस और सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता मिली है। जिले में चलाए जा रहे विशेष अभियान ‘ऑपरेशन अंतिम प्रहार’ के दौरान 5 वरिष्ठ नक्सलियों ने पुलिस और सीआरपीएफ अधिकारियों के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों पर महाराष्ट्र शासन की ओर से कुल 38 लाख रुपए का इनाम घोषित था।
सरेंडर करने वालों में डीवीसीएम (डिविजनल कमेटी मेंबर), पीपीसीएम (प्लाटून पार्टी कमेटी मेंबर) और एसीएम (एरिया कमेटी मेंबर) स्तर के नक्सली शामिल हैं, जिन्हें संगठन में सक्रिय और प्रभावशाली माना जाता था। सुरक्षा एजेंसियां इसे नक्सल नेटवर्क को बड़ा झटका मान रही हैं।
ये नक्सली हुए शामिल
पुलिस के अनुसार आत्मसमर्पण करने वालों में— मधु उर्फ राकेश उर्फ बाजीराव बुकलू वेल्दा (52 वर्ष)
निवासी ग्राम बुरगी, तहसील एटापल्ली, जिला गढ़चिरौली। यह कुतुर एरिया कुरियर टीम में डीवीसीएम स्तर का नक्सली था। जीवन उर्फ जुग्गु उर्फ भीमा देवा मड़काम (26 वर्ष) निवासी ग्राम तोयाम, तहसील कोंटा, जिला सुकमा (छत्तीसगढ़)। कंपनी नंबर 7 में पीपीसीएम के रूप में सक्रिय था। रजनी उर्फ दुर्गा उर्फ रामोति धुर्वा (40 वर्ष) निवासी ग्राम कातुलझोरा, तहसील मोहला, जिला एमएमसी (छत्तीसगढ़)। नेलनार टेक्निकल टीम में एसीएम की जिम्मेदारी संभाल रही थी। मंगली रघु कुरसाम (22 वर्ष) निवासी ग्राम सवनार, तहसील उसूर, जिला बीजापुर। कंपनी नंबर 10 की सदस्य थी। लक्ष्मी डेंगा पुनेम (25 वर्ष) निवासी ग्राम शिकुरभाट्टी, तहसील भैरमगढ़/बासागुड़ा क्षेत्र, जिला बीजापुर।
स्टाफ टीम की सदस्य के रूप में सक्रिय थी।
कई मामलों में थे वांछित
आत्मसमर्पण करने वाले सभी नक्सलियों के खिलाफ महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ के विभिन्न थानों में हत्या, पुलिस पार्टी पर हमला, आगजनी, विस्फोट और नक्सली गतिविधियों से जुड़े कई गंभीर अपराध दर्ज बताए जा रहे हैं। सुरक्षा एजेंसियां लंबे समय से इनकी तलाश में जुटी थीं।
‘ऑपरेशन अंतिम प्रहार’ का असर
गढ़चिरौली पुलिस द्वारा चलाया जा रहा ऑपरेशन अंतिम प्रहार नक्सल नेटवर्क को कमजोर करने की दिशा में अहम अभियान माना जा रहा है। इस अभियान के तहत लगातार सर्च ऑपरेशन, इंटेलिजेंस बेस्ड कार्रवाई और आत्मसमर्पण नीति पर फोकस किया जा रहा है। हाल के महीनों में कई नक्सलियों ने हथियार छोड़ मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया है।
नक्सल संगठन को बड़ा झटका
सुरक्षा अधिकारियों के मुताबिक, जिन स्तर के नक्सलियों ने सरेंडर किया है, वे संगठन की रणनीतिक और लॉजिस्टिक गतिविधियों में अहम भूमिका निभाते थे। खासतौर पर टेक्निकल टीम, कुरियर नेटवर्क और कंपनी संचालन से जुड़े कैडर के आत्मसमर्पण से नक्सली संगठन की आंतरिक संरचना प्रभावित हो सकती है। गढ़चिरौली, बीजापुर, सुकमा और मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी का सीमावर्ती इलाका लंबे समय से नक्सल गतिविधियों का संवेदनशील क्षेत्र रहा है। ऐसे में इस सामूहिक आत्मसमर्पण को सुरक्षा बलों की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

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