पब्लिक स्वर,खैरागढ़। खैरागढ़ के बख्शी मार्ग स्थित राधाकृष्ण मंदिर में रविवार सुबह उस समय हलचल मच गई, जब मंदिर परिसर में एक दुर्लभ वन्यजीव दिखाई दिया। रोज की तरह पूजा की तैयारी चल रही थी। इसी दौरान पुजारी की नजर मंदिर के ऊपरी छज्जे पर बैठी दो चमकती आंखों पर पड़ी। शुरुआत में लोगों को लगा कि कोई सामान्य जंगली जानवर होगा, लेकिन करीब जाकर देखने पर पता चला कि मंदिर के भीतर एक पाम सिवेट दुबका हुआ बैठा है।
कुछ ही देर में मंदिर परिसर में लोगों की भीड़ जुट गई। इलाके में “वन्यजीव मंदिर में घुस आया” की खबर तेजी से फैल गई। स्थानीय लोग पहले इसे “कबरबिज्जू” समझ रहे थे, लेकिन वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर इसकी पहचान पाम सिवेट (Palm Civet) के रूप में की। भीड़ और शोरगुल के बीच सहमा हुआ यह जीव मंदिर के एक कोने में लगातार छिपने की कोशिश करता रहा।
एक घंटे चला रेस्क्यू ऑपरेशन
सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और लोगों को सुरक्षित दूरी पर हटाया गया। करीब एक घंटे तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद पाम सिवेट को सुरक्षित पकड़ लिया गया। बाद में उसे शहर से दूर वन क्षेत्र में छोड़ दिया गया। वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक रेस्क्यू के दौरान सबसे बड़ी चुनौती भीड़ को नियंत्रित करना था, क्योंकि ज्यादा शोर और घेराव से वन्यजीव तनाव में आ सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि पाम सिवेट आमतौर पर इंसानों पर हमला नहीं करता, लेकिन खतरा महसूस होने पर आक्रामक व्यवहार कर सकता है।
क्या होता है पाम सिवेट?
पाम सिवेट का वैज्ञानिक नाम Paradoxurus hermaphroditus है। यह दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया में पाया जाने वाला एक निशाचर स्तनधारी जीव है। इसकी पहचान बड़ी चमकदार आंखों, लंबी पूंछ और पेड़ों पर तेजी से चढ़ने की क्षमता से होती है। यह अधिकतर रात में सक्रिय रहता है और पेड़ों पर रहना पसंद करता है। भारत के कई हिस्सों में इसे अलग-अलग स्थानीय नामों से जाना जाता है। ग्रामीण क्षेत्रों में अक्सर लोग इसे कबरबिज्जू समझ लेते हैं, जबकि यह एक अलग प्रजाति का वन्यजीव है।
जंगल का “फॉरेस्ट गार्डनर”
वन्यजीव विशेषज्ञ पाम सिवेट को जंगल के पारिस्थितिक तंत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानते हैं। यह फलों को खाकर उनके बीज अलग-अलग स्थानों तक पहुंचाता है, जिससे जंगलों में प्राकृतिक रूप से नए पौधे उगने में मदद मिलती है। इसी वजह से इसे “फॉरेस्ट गार्डनर” यानी जंगल का प्राकृतिक बीज वाहक भी कहा जाता है।
डीएफओ ने लोगों से की अपील
खैरागढ़ डीएफओ ने लोगों से अपील की है कि किसी भी वन्यजीव के दिखाई देने पर उसे पकड़ने, भगाने या घेरने की कोशिश न करें। ऐसी स्थिति में तुरंत वन विभाग को सूचना देना सबसे सुरक्षित और जिम्मेदार कदम है। उन्होंने कहा कि भीड़ और अफरा-तफरी से वन्यजीव तनाव में आ सकते हैं, जिससे इंसानों और जानवर दोनों के लिए खतरा बढ़ जाता है।

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