धमतरी के अछोटा में भ्रष्टाचार के खिलाफ ग्रामीणों का उग्र प्रदर्शन, जिला पंचायत सदस्य के पति पर गंभीर आरोप



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पब्लिक स्वर,धमतरी। धमतरी जिले के ग्राम अछोटा में मंगलवार को भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश खुलकर सामने आया। गांव में पहले सामूहिक प्रदर्शन हुआ और उसके बाद धमतरी–सिहावा मुख्य मार्ग पर करीब एक घंटे तक चक्काजाम कर दिया गया। प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने वर्तमान जिला पंचायत सदस्य मोनिका देवांगन के पति ऋषभ देवांगन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि गांव में रिपा निर्माण, अवैध रेत उत्खनन, तालाब सौंदर्यकरण और शासकीय जमीन की बिक्री जैसे कार्यों में करोड़ों रुपये का घोटाला हुआ है।

ग्रामीणों का कहना है कि यह मुद्दा नया नहीं है, बल्कि पिछले एक साल से वे लगातार शिकायत करते आ रहे हैं। कलेक्टर स्तर तक मामले पहुंचने और कार्रवाई के निर्देश जारी होने के बावजूद अब तक किसी के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं की गई। इससे नाराज होकर ग्रामीणों ने सड़क पर उतरने का फैसला लिया। प्रदर्शन के दौरान लोगों ने तख्तियां लेकर नारेबाजी की और जिम्मेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।

स्थिति उस समय तनावपूर्ण हो गई जब चक्काजाम के दौरान पुलिस और ग्रामीण आमने-सामने आ गए। दोनों के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति बनी। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उन्हें जबरन हटाने की कोशिश की और कुछ लोगों के साथ दुर्व्यवहार भी किया। इस घटना के वीडियो भी सामने आए हैं, जिनमें पुलिसकर्मी प्रदर्शनकारियों को धक्का देते नजर आ रहे हैं। हालांकि, मौके पर पहुंचे प्रशासनिक अधिकारियों ने स्थिति को संभाला।

ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि पंचायत के पूर्व और वर्तमान पदाधिकारियों ने मिलकर लंबे समय से भ्रष्टाचार किया है। उनका कहना है कि पूर्व सरपंच और उप सरपंच के खिलाफ जांच में आरोप साबित होने के बावजूद अब तक दंडात्मक कार्रवाई नहीं हुई। वहीं, वर्तमान सरपंच और जिला पंचायत सदस्य सत्तारूढ़ दल से जुड़े होने के कारण राजनीतिक दबाव के चलते कार्रवाई रुकी हुई है। ग्रामीणों ने भाजपा और कांग्रेस दोनों पर मिलीभगत का आरोप लगाते हुए कहा कि सत्ता बदलने के बाद भी भ्रष्टाचार पर रोक नहीं लग रही है।

मामले को लेकर ग्रामीणों ने कानूनी रास्ता भी अपनाया। उन्होंने सचिव, सरपंच और पंच के खिलाफ एसडीएम कोर्ट में मामला दर्ज कराया, जिसमें करीब आठ महीने बाद आए फैसले में शासकीय जमीन के पैसे के दुरुपयोग की पुष्टि हुई। इसके बावजूद संबंधित अधिकारियों पर कोई आपराधिक कार्रवाई नहीं की गई। इससे ग्रामीणों में और नाराजगी बढ़ गई है।

ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि पंचायत के महत्वपूर्ण दस्तावेज जैसे ग्राम सभा रजिस्टर और कार्यवाही रजिस्टर गायब कर दिए गए हैं, ताकि घोटाले के सबूत छुपाए जा सकें। उन्होंने खनिज विभाग पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि अवैध उत्खनन को रोकने के बजाय उसे बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे गांव का माहौल खराब हो रहा है।

प्रदर्शन में महिलाओं की भी बड़ी भागीदारी देखने को मिली। महिलाओं ने कहा कि वे लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर भटक रही हैं, लेकिन उनकी कहीं सुनवाई नहीं हो रही। उनका आरोप है कि हर बार ग्राम विकास समिति को ही निशाना बनाया जाता है, जबकि असली दोषी बच निकलते हैं।

चक्काजाम की सूचना मिलने पर मौके पर पहुंचे एसडीएम पीयूष तिवारी ने ग्रामीणों को समझाइश दी और जांच कर कार्रवाई का आश्वासन दिया। इसके बाद करीब एक घंटे बाद चक्काजाम समाप्त हुआ, लेकिन ग्रामीण सड़क किनारे टेंट लगाकर धरने पर बैठ गए और अपनी मांगों पर अड़े रहे। एसडीएम ने बताया कि मामले की जानकारी उन्हें वीडियो के माध्यम से मिली है और प्रारंभिक स्तर पर एक उप सरपंच और एक वर्तमान पंच को पद से हटाया गया है, जबकि अन्य आरोपों की जांच जारी है।

फिलहाल, ग्रामीणों की मुख्य मांग दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कड़ी कार्रवाई करने की है। लगातार बढ़ते विरोध और सामने आ रहे आरोपों ने प्रशासन और स्थानीय राजनीति दोनों को कठघरे में खड़ा कर दिया है। अब यह देखना अहम होगा कि जांच के बाद जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई होती है और क्या ग्रामीणों को न्याय मिल पाता है।



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