अभनपुर जनपद पंचायत में बिना चर्चा पास हुआ करोड़ों का गौण खनिज राशि आवंटन?, पूर्व विधायक धनेन्द्र साहू के साथ 11 सदस्य पहुंचे मंत्रालय



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पब्लिक स्वर,अभनपुर/रायपुर। रायपुर जिले के जनपद पंचायत अभनपुर में वित्तीय वर्ष 2021-22 की गौण खनिज मद की राशि के आवंटन को लेकर शुरू हुआ विवाद अब प्रशासनिक और राजनीतिक मुद्दा बनता जा रहा है। जनपद के 11 निर्वाचित सदस्यों ने वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं पूर्व विधायक धनेन्द्र साहू के साथ पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सचिव से मंत्रालय में मुलाकात कर विस्तृत शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में न केवल आवंटन प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं, बल्कि नियमों की अनदेखी, पक्षपात और वित्तीय अनियमितता की आशंका भी जताई गई है।

कैसे शुरू हुआ विवाद

पूरा मामला 29 अप्रैल 2026 को आयोजित जनपद पंचायत की सामान्य सभा की बैठक से जुड़ा है। आरोप है कि बैठक के दौरान जनपद अध्यक्ष द्वारा पहले से तैयार की गई गांवों की सूची प्रस्तुत की गई और उसी के आधार पर गौण खनिज मद की राशि आवंटित करने का प्रस्ताव रखा गया।

सदस्यों का कहना है कि इस सूची पर न तो कोई विस्तृत चर्चा की गई और न ही सदस्यों से सुझाव या आपत्तियां मांगी गईं। बैठक कुछ ही मिनटों में समाप्त कर दी गई, जिससे कई सदस्य अपनी बात तक नहीं रख पाए।


पूर्व निर्धारित सूची’ पर सवाल

शिकायतकर्ताओं का दावा है कि सूची पहले से तैयार थी और उसमें किन ग्रामों को कितनी राशि दी जानी है, यह तय कर लिया गया था। इससे यह आशंका मजबूत होती है कि आवंटन प्रक्रिया पहले ही तय कर ली गई थी और बैठक केवल औपचारिकता बनकर रह गई।

नियमों की अनदेखी के आरोप

गौण खनिज मद का उपयोग सामान्यतः उन क्षेत्रों के विकास के लिए किया जाता है, जो खनन गतिविधियों से सीधे या आंशिक रूप से प्रभावित होते हैं। इसमें सड़क, पेयजल, स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण और बुनियादी सुविधाओं के विकास को प्राथमिकता दी जाती है।
लेकिन जनपद सदस्यों का आरोप है कि: 

खनन से प्रभावित ग्रामों को प्राथमिकता नहीं दी गई
कई गैर-प्रभावित ग्रामों को अपेक्षाकृत अधिक राशि आवंटित कर दी गई

कुछ दूरस्थ और कम प्रभावित क्षेत्रों को भी भारी-भरकम फंड दिया गया

बहुमत के आधार पर प्रस्ताव पारित करने पर विवाद

इसके साथ ही सदस्यों ने आरोप लगाया कि जब उन्होंने इस प्रक्रिया का विरोध किया, तब अध्यक्ष और मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) ने प्रस्ताव को “बहुमत से पारित” घोषित कर दिया।

हालांकि, विरोध करने वाले सदस्यों का कहना है कि:
वास्तविक बहुमत की स्थिति स्पष्ट नहीं थी

मतदान की पारदर्शी प्रक्रिया नहीं अपनाई गई

विरोध दर्ज करने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया गया
 
मंत्रालय तक पहुंचा मामला

मामले की गंभीरता को देखते हुए 11 सदस्यों का प्रतिनिधिमंडल पूर्व विधायक धनेन्द्र साहू के साथ मंत्रालय पहुंचा और पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सचिव को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में विस्तृत जांच की मांग करते हुए कहा गया है कि यदि समय रहते हस्तक्षेप नहीं किया गया, तो यह मामला बड़े स्तर की वित्तीय अनियमितता में बदल सकता है।

क्या हैं प्रमुख मांगें

शिकायत में सदस्यों ने प्रशासन से निम्नलिखित मांगें की हैं:
पूरे आवंटन प्रक्रिया की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच
29 अप्रैल की बैठक में पारित प्रस्ताव को तत्काल निरस्त करना

जिम्मेदार अधिकारियों और पदाधिकारियों पर सख्त कार्रवाई

गौण खनिज मद की राशि का पुनः निर्धारण, जिसमें प्रभावित ग्रामों को प्राथमिकता दी जाए

भविष्य में ऐसी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और जनप्रतिनिधियों की सहभागिता सुनिश्चित करना


फिलहाल यह मामला सामने आने के बाद अभनपुर जनपद की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। एक ओर जहां शिकायत करने वाले सदस्य इसे लोकतांत्रिक अधिकारों और पारदर्शिता का मुद्दा बता रहे हैं, वही दूसरी ओर जनपद अध्यक्ष और प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं।



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