ड्रोन सर्वे और मुआवजे को लेकर भड़के ग्रामीण, SDM कार्यालय के बाहर धरना



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पब्लिक स्वर,कोरबा। एसईसीएल कुसमुंडा क्षेत्र के भूविस्थापित ग्रामीणों का गुस्सा बुधवार को फूट पड़ा। 16 से अधिक गांवों के प्रभावित ग्रामीणों ने अपनी लंबित मांगों और भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर कटघोरा एसडीएम कार्यालय का घेराव किया। बड़ी संख्या में पहुंचे ग्रामीणों ने प्रशासन और एसईसीएल के खिलाफ जमकर नारेबाजी की तथा धरने पर बैठ गए।

ग्रामीणों का आरोप है कि रोजगार, मुआवजा, पुनर्वास, वंश वृक्ष, फौती, ऑनलाइन रिकॉर्ड सुधार और राजस्व त्रुटि सुधार जैसे जरूरी काम महीनों से तहसील कार्यालयों में लंबित पड़े हैं। उनका कहना है कि दीपका, दर्री, कटघोरा तहसील और जिला पुनर्वास शाखा में काम कराने के लिए रिश्वत की मांग की जाती है। रिश्वत नहीं देने पर फाइलों को लंबे समय तक अटका दिया जाता है।

प्रदर्शनकारी ग्रामीणों ने बताया कि एसईसीएल ने जटराज, पड़निया, सोनपुरी, पाली, रिसदी, खोडरी, चुरैल, आमगांव, खैरभावना, गेवरा, जरहाजेल, बरपाली, दुरपा, भैसमाखार, मनगांव, बरमपुर, दुल्लापुर और बरकुटा समेत 16 से अधिक गांवों की जमीन अधिग्रहित की है। बावजूद इसके प्रभावित परिवार आज भी मूलभूत सुविधाओं, पुनर्वास और अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि भूमिहीन परिवारों को बसाहट का अधिकार नहीं दिया जा रहा है। उनका कहना है कि सरकारी और निजी जमीन पर वर्षों से मकान बनाकर रह रहे कई परिवार अब बेघर होने की कगार पर हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना का हवाला देते हुए कहा कि भूमिहीनों को आवास मिलना चाहिए, लेकिन एसईसीएल की नीतियों के कारण उन्हें लाभ नहीं मिल पा रहा है।

ग्रामीणों ने एसईसीएल के ड्रोन सर्वे पर भी सवाल उठाए। उनका आरोप है कि बिना सहमति के संपत्तियों का मूल्यांकन किया जा रहा है, जिससे मुआवजा राशि कम होने की आशंका है। वहीं, जटराज गांव के लोगों ने 2010 में भूमि अधिग्रहण के बाद कुछ लोगों को ‘मसाहती’ मानने और बाकी को बाहर रखने पर नाराजगी जताई।

ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने पहले भी कई बार शिकायतें कीं, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इसी कारण मजबूर होकर उन्हें एसडीएम कार्यालय का घेराव करना पड़ा। प्रदर्शन के दौरान ग्रामीण हाथों में तख्तियां लेकर अपनी मांगों के समर्थन में धरने पर बैठे रहे और चेतावनी दी कि मांगें पूरी नहीं होने तक आंदोलन जारी रहेगा।

स्थिति को देखते हुए मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया। प्रशासनिक अधिकारियों ने ग्रामीणों को समझाने और उनकी समस्याओं के समाधान का भरोसा दिलाने की कोशिश की।
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