पब्लिक स्वर,कांकेर। कांकेर जिले में तेंदुए की बढ़ती गतिविधियों ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। बीते छह दिनों के भीतर तेंदुए के हमलों में चार लोग घायल हो चुके हैं। लगातार हो रही घटनाओं के बाद प्रभावित गांवों में भय का माहौल है। स्थिति ऐसी है कि शाम होते ही लोग घरों में दुबकने को मजबूर हैं और बच्चों को अकेले बाहर भेजने से भी कतरा रहे हैं।
गट्टागुडुम और देवडोंगर में हमले
जानकारी के अनुसार, सरोना वन परिक्षेत्र के अंतर्गत आने वाले गट्टागुडुम गांव में पिछले एक सप्ताह से तेंदुए की लगातार मौजूदगी देखी जा रही है। 16 जून को तेंदुआ गांव में घुस आया और एक कुत्ते का शिकार कर लिया। इसके बाद उसने अलग-अलग घटनाओं में धनेश कुंजाम, बुधन उइके और फूलबाई पर हमला कर उन्हें घायल कर दिया। ग्रामीणों की सतर्कता और समय रहते मौके पर लोगों के पहुंच जाने से तीनों की जान बच गई। वहीं 18 जून को नरहरपुर क्षेत्र के देवडोंगर गांव में भी तेंदुए ने एक ग्रामीण पर हमला कर दिया, जिससे वह घायल हो गया। सभी घायलों का उपचार जारी है।
शाम ढलते ही गांवों में छा जाता है सन्नाटा
लगातार हो रहे हमलों के कारण गट्टागुडुम और आसपास के गांवों में सामान्य जनजीवन प्रभावित हो गया है। ग्रामीणों के मुताबिक, अंधेरा होते ही लोग घरों के दरवाजे बंद कर लेते हैं। किसी जरूरी काम से बाहर निकलना पड़े तो लोग समूह बनाकर लाठी-डंडों के साथ निकल रहे हैं।बच्चों को स्कूल भेजने, महिलाओं के खेत या अन्य कामों के लिए अकेले बाहर जाने को लेकर भी परिजन चिंतित हैं। गांव की गलियां, जहां पहले देर शाम तक चहल-पहल रहती थी, अब सुनसान नजर आने लगी हैं।
ग्रामीणों की मांग, वन विभाग बढ़ाए निगरानी
लगातार हमलों के बाद ग्रामीणों ने वन विभाग से तेंदुए की गतिविधियों पर नजर रखने, प्रभावित क्षेत्रों में गश्त बढ़ाने और लोगों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब तक तेंदुए की मौजूदगी पर प्रभावी नियंत्रण नहीं किया जाता, तब तक ग्रामीणों में भय का माहौल बना रहेगा। फिलहाल वन विभाग की टीम स्थिति पर नजर बनाए हुए है, लेकिन ग्रामीणों को राहत मिलने का इंतजार है।

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