पब्लिक स्वर,रायपुर। छत्तीसगढ़ में बढ़ते बिजली बिल, स्मार्ट मीटर और बिजली दरों में लगातार हो रही वृद्धि को लेकर कांग्रेस ने भाजपा सरकार के खिलाफ प्रदेशव्यापी आंदोलन तेज करने का फैसला किया है। पार्टी ने आरोप लगाया है कि सरकार की नीतियों के कारण आम उपभोक्ताओं और किसानों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है, जबकि बड़े उद्योगपतियों को लाभ पहुंचाने वाले फैसलों को प्राथमिकता दी जा रही है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि बिजली उपभोक्ताओं की शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं। बिजली बिलों में गड़बड़ी और बढ़े हुए बिलों को लेकर लोग बिजली दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उन्हें संतोषजनक समाधान नहीं मिल रहा। ऐसे में कांग्रेस ने इस मुद्दे को जनता के बीच ले जाने और सरकार पर दबाव बनाने के लिए चरणबद्ध आंदोलन की रणनीति तैयार की है।
तीन चरणों में चल रहा आंदोलन
कांग्रेस ने बिजली दर वृद्धि और स्मार्ट मीटर के मुद्दे पर तीन चरणों में प्रदेशव्यापी आंदोलन शुरू किया है। पहला चरण: 17 जून को प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों में बिजली कार्यालयों का घेराव किया गया और मुख्यमंत्री का पुतला दहन कर विरोध प्रदर्शन किया गया।
दूसरा चरण: 18 जून को जिला स्तर पर प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर कांग्रेस नेताओं ने बिजली दरों में वृद्धि, स्मार्ट मीटर और उपभोक्ताओं की समस्याओं को लेकर अपना पक्ष जनता के सामने रखा।
तीसरा चरण: जुलाई के पहले सप्ताह से कांग्रेस कार्यकर्ता घर-घर पहुंचकर स्मार्ट मीटर हटाने के समर्थन में आवेदन और समर्थन पत्र भरवाएंगे। पार्टी का दावा है कि इस अभियान के जरिए जनता की राय एकत्र कर सरकार तक पहुंचाई जाएगी।
मानसून सत्र में सरकार को घेरने की तैयारी
कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि आगामी मानसून सत्र में यह मुद्दा प्रमुखता से उठाया जाएगा। नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल बिजली दरों में वृद्धि, स्मार्ट मीटर और उपभोक्ताओं की शिकायतों को लेकर सरकार से जवाब मांगेंगे। पार्टी का कहना है कि पेट्रोल, डीजल और खाद की बढ़ती कीमतों के साथ बिजली दरों में वृद्धि भी आम जनता की चिंता का बड़ा विषय बन चुकी है। ऐसे में सरकार को इस मुद्दे पर स्पष्ट जवाब देना होगा।
स्मार्ट मीटर पर कांग्रेस के आरोप
दीपक बैज ने आरोप लगाया कि स्मार्ट मीटर और बिजली क्षेत्र से जुड़ी कुछ योजनाएं बड़े कॉर्पोरेट समूहों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से लागू की जा रही हैं। उनका दावा है कि स्मार्ट मीटर लगाए जाने के बाद कई उपभोक्ताओं ने बिजली बिल बढ़ने की शिकायत की है, जिससे लोगों में असंतोष बढ़ रहा है। हालांकि सरकार और बिजली कंपनियां स्मार्ट मीटर को बिजली उपभोग की सटीक निगरानी, पारदर्शिता और तकनीकी सुधार का माध्यम बताती रही हैं। ऐसे में स्मार्ट मीटर को लेकर राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है।
बढ़ती बिजली दरें बनीं सियासी मुद्दा
कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा सरकार बनने के बाद बिजली दरों में कई बार वृद्धि की गई है, जिसका सीधा असर घरेलू उपभोक्ताओं और किसानों पर पड़ा है। पार्टी का कहना है कि लगातार बढ़ती दरों और बढ़े हुए बिजली बिलों ने आम लोगों की आर्थिक चिंताओं को और बढ़ा दिया है। जुलाई में शुरू होने वाला घर-घर अभियान और मानसून सत्र में होने वाली राजनीतिक टकराहट यह संकेत दे रही है कि बिजली, स्मार्ट मीटर और बढ़ती दरों का मुद्दा आने वाले दिनों में छत्तीसगढ़ की राजनीति का एक प्रमुख विषय बन सकता है।

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