पब्लिक स्वर,रायपुर/बिलासपुर। छत्तीसगढ़ योग आयोग के अध्यक्ष और भाजपा के वरिष्ठ नेता रूपनारायण सिन्हा का मंगलवार को कार्डियक अरेस्ट से निधन हो गया। साय सरकार में उन्हें कैबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त था। उनके अचानक निधन की खबर से भाजपा संगठन, राजनीतिक गलियारों और सामाजिक क्षेत्र में शोक की लहर फैल गई है।
जानकारी के मुताबिक रूपनारायण सिन्हा बिलासपुर के तिफरा में आयोजित भाजपा के दो दिवसीय पंडित दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण महाअभियान 2026 में शामिल होने पहुंचे थे। इस प्रशिक्षण अभियान की जिम्मेदारी भी उनके पास थी। कार्यक्रम के दूसरे दिन अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई। मौके पर मौजूद पदाधिकारियों ने उन्हें तत्काल इलाज के लिए बिलासपुर स्थित सिम्स अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
संगठन और योग गतिविधियों में सक्रिय भूमिका
रूपनारायण सिन्हा लंबे समय से भाजपा संगठन से जुड़े हुए थे और पार्टी के विभिन्न अभियानों में सक्रिय भूमिका निभाते रहे। उन्हें संगठनात्मक क्षमता और अनुशासित कार्यशैली के लिए जाना जाता था। छत्तीसगढ़ योग आयोग के अध्यक्ष के रूप में उन्होंने प्रदेश में योग और स्वास्थ्य जागरूकता से जुड़े कई कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने का प्रयास किया। राजनीतिक गतिविधियों के साथ-साथ वे सामाजिक और योग अभियानों में भी लगातार सक्रिय रहे। भाजपा के प्रशिक्षण कार्यक्रमों में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती थी। पार्टी के भीतर उन्हें एक अनुभवी और संगठननिष्ठ नेता के रूप में देखा जाता था।
कार्यक्रम में मौजूद थे कई वरिष्ठ नेता
बिलासपुर के तिफरा में आयोजित भाजपा जिला संगठन के प्रशिक्षण वर्ग का शुभारंभ सोमवार को हुआ था। कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री अरुण साव, सांसद रूपकुमारी चौधरी, विधायक अमर अग्रवाल समेत भाजपा के कई वरिष्ठ नेता, जनप्रतिनिधि और पदाधिकारी मौजूद थे। मंगलवार को प्रशिक्षण वर्ग के दौरान ही रूपनारायण सिन्हा की तबीयत अचानक बिगड़ी। उनके निधन के बाद कार्यक्रम में मौजूद नेताओं और कार्यकर्ताओं ने गहरा दुख व्यक्त किया। भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच शोक का माहौल देखा गया।
रायपुर ले जाया गया पार्थिव शरीर
अस्पताल में औपचारिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद परिजन उनका पार्थिव शरीर लेकर रायपुर रवाना हो गए। उनके अंतिम संस्कार और श्रद्धांजलि कार्यक्रम को लेकर पार्टी और परिवार की ओर से आगे जानकारी दी जाएगी। रूपनारायण सिन्हा का निधन भाजपा संगठन के लिए एक बड़ी क्षति माना जा रहा है। संगठनात्मक अनुभव और सामाजिक सक्रियता के कारण वे कार्यकर्ताओं के बीच काफी लोकप्रिय थे।

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