पब्लिक स्वर,मनेन्द्रगढ़। एमसीबी जिले में एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने बिजली विभाग में फैले भ्रष्टाचार पर बड़ी कार्रवाई करते हुए कनिष्ठ अभियंता (JE) को रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। घरेलू बिजली कनेक्शन जारी करने के एवज में रिश्वत मांगने की शिकायत पर ACB ने योजनाबद्ध ट्रैप कार्रवाई कर आरोपी अधिकारी को पकड़ा। इस कार्रवाई के बाद बिजली विभाग में हड़कंप मच गया है।
जानकारी के मुताबिक, मनेंद्रगढ़ क्षेत्र के डोमनापारा निवासी रमेश कुमार ने अपने घर के लिए घरेलू बिजली कनेक्शन का आवेदन किया था। आरोप है कि बिजली विभाग के कनिष्ठ अभियंता मनीष कुमार बजाज और लाइनमैन राकेश शुक्ला ने कनेक्शन जारी करने के बदले 10 हजार रुपये की मांग की थी। दोनों कर्मचारियों ने कथित तौर पर कहा था कि घर तक लाइन खींचने और अन्य प्रक्रिया में खर्च आता है, इसलिए “काम करवाने” के लिए पैसे देने होंगे।
शिकायत के बाद हरकत में आई ACB
रिश्वत की मांग से परेशान होकर रमेश कुमार ने अंबिकापुर स्थित एंटी करप्शन ब्यूरो कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई। ACB ने शिकायत की प्रारंभिक जांच की, जिसमें रिश्वत मांगने की पुष्टि होने के बाद ट्रैप की योजना बनाई गई।
इसके बाद ACB टीम मनेंद्रगढ़ पहुंची और शिकायतकर्ता को तय रकम लेकर आरोपियों के पास भेजा गया। जैसे ही शिकायतकर्ता ने 9 हजार 500 रुपये कनिष्ठ अभियंता मनीष कुमार बजाज को दिए, पहले से निगरानी कर रही ACB टीम ने तत्काल दबिश देकर उसे रंगे हाथ पकड़ लिया।
लाइनमैन से भी पूछताछ
कार्रवाई के दौरान लाइनमैन राकेश शुक्ला की भूमिका भी सामने आई है। ACB ने दोनों आरोपियों को हिरासत में लेकर आगे की पूछताछ के लिए अंबिकापुर रवाना किया है। मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई की जा रही है।
आम लोगों की मजबूरी बन रहा भ्रष्टाचार
ग्रामीण और छोटे शहरों में बिजली कनेक्शन जैसे बुनियादी कामों के लिए रिश्वत मांगने की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं। सरकारी योजनाओं और प्रक्रियाओं के बावजूद आम लोगों को सुविधा पाने के लिए अतिरिक्त रकम देने का दबाव झेलना पड़ता है। ऐसे मामलों में ACB की कार्रवाई प्रशासनिक तंत्र को साफ संदेश देती है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ निगरानी लगातार जारी है।
विभागीय कार्रवाई भी संभव
सूत्रों के अनुसार, ACB की रिपोर्ट के आधार पर बिजली विभाग द्वारा दोनों कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी की जा सकती है। जांच में यदि और कर्मचारियों की संलिप्तता सामने आती है तो कार्रवाई का दायरा बढ़ सकता है।

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