पब्लिक स्वर,दुर्ग। राज्य सरकार द्वारा जनता की समस्याओं के त्वरित समाधान के उद्देश्य से चलाए जा रहे सुशासन तिहार कार्यक्रम के दौरान दुर्ग जिले के थनौद गांव में विवाद की स्थिति बन गई। कार्यक्रम में शिकायत लेकर पहुंचे भाजपा नेता और जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) के बीच तीखी बहस हो गई। देखते ही देखते मामला इतना बढ़ गया कि दोनों के बीच तीखे शब्दों का आदान-प्रदान होने लगा। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
शिकायत के दौरान शुरू हुआ विवाद
जानकारी के मुताबिक, थनौद गांव में आयोजित सुशासन तिहार कार्यक्रम में ग्रामीणों की समस्याएं और शिकायतें सुनी जा रही थीं। इसी दौरान भाजपा के दुर्ग ग्रामीण मंडल महामंत्री पुराण देशमुख अपनी शिकायत लेकर पहुंचे। शिकायत सामुदायिक भवन निर्माण से जुड़ी राशि जारी किए जाने को लेकर थी।
बताया जा रहा है कि पूर्व सरपंच के कार्यकाल में सामुदायिक भवन का निर्माण कार्य चल रहा था, जिस पर पुराण देशमुख ने आपत्ति दर्ज कराते हुए स्टे लगवाया था। उनका आरोप था कि स्टे की स्थिति स्पष्ट हुए बिना वर्तमान सरपंच के कार्यकाल में निर्माण से संबंधित राशि कैसे जारी कर दी गई। इस मुद्दे को लेकर उन्होंने कार्यक्रम में मौजूद जनपद CEO रूपेश पांडे से जवाब मांगा। इसी दौरान दोनों के बीच बहस शुरू हो गई, जो कुछ ही देर में तीखी नोकझोंक में बदल गई।
"जो करना है कर ले" टिप्पणी पर बढ़ा विवाद
वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि बहस के दौरान माहौल काफी तनावपूर्ण हो जाता है। वीडियो में जनपद CEO रूपेश पांडे भाजपा नेता की ओर उंगली दिखाते हुए कथित तौर पर कहते सुनाई देते हैं, "तेरे को जो करना है कर ले।" यह टिप्पणी सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है। कई लोग इसे एक प्रशासनिक अधिकारी के पद की गरिमा के अनुरूप नहीं मान रहे हैं, जबकि कुछ लोगों का कहना है कि पूरे घटनाक्रम की पूरी पृष्ठभूमि सामने आने के बाद ही निष्कर्ष निकाला जाना चाहिए।
विधायक की भूमिका पर भी उठ रहे सवाल
विवाद के दौरान दुर्ग ग्रामीण विधायक ललित चंद्राकर भी मौके पर मौजूद थे। वायरल वीडियो में विधायक दोनों पक्षों के बीच खड़े दिखाई देते हैं, लेकिन वे किसी भी पक्ष में हस्तक्षेप करते नजर नहीं आते। इसी बात को लेकर सोशल मीडिया पर उनकी भूमिका पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। कई यूजर्स का कहना है कि जब कार्यक्रम का माहौल बिगड़ रहा था, तब जनप्रतिनिधि होने के नाते उन्हें मध्यस्थता कर स्थिति को शांत कराने का प्रयास करना चाहिए था। हालांकि, विधायक की ओर से इस मामले में अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
सुशासन तिहार के उद्देश्य पर सवाल
सुशासन तिहार का उद्देश्य जनता की शिकायतों का समाधान और प्रशासन व नागरिकों के बीच संवाद को मजबूत करना है। लेकिन थनौद में हुई यह घटना इस बात पर चर्चा छेड़ रही है कि शिकायत निवारण मंचों पर संवाद की भाषा और प्रशासनिक संवेदनशीलता कितनी महत्वपूर्ण है। वायरल वीडियो के बाद अब लोगों की नजर प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की प्रतिक्रिया पर टिकी हुई है। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि संबंधित विवाद की जांच या स्पष्टीकरण को लेकर कोई आधिकारिक कदम उठाया जाता है या नहीं।
फिलहाल सोशल मीडिया पर छाया मामला
घटना का वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोग भाजपा नेता के सवालों को जायज बता रहे हैं, जबकि कुछ का कहना है कि सार्वजनिक मंच पर इस तरह का टकराव सुशासन तिहार जैसे कार्यक्रमों की मूल भावना के विपरीत है। फिलहाल, थनौद का यह विवाद जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है और प्रशासन की अगली प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है।

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