सरकारी दफ्तर में जाम छलकाते दिखे कर्मचारी, विभाग पर उठे सवाल



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पब्लिक स्वर,बालोद। बालोद जिले के मालीघोरी धान संग्रहण केंद्र से सरकारी व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। यहां जिला विपणन विभाग से जुड़े कर्मचारियों का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें सरकारी कार्यालय परिसर के भीतर कथित रूप से शराब पार्टी करते हुए कुछ लोग नजर आ रहे हैं। वीडियो सामने आने के बाद विभागीय अनुशासन, सरकारी संपत्ति के दुरुपयोग और अधिकारियों की जवाबदेही को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

जानकारी के अनुसार, मालीघोरी धान संग्रहण केंद्र में पदस्थ दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी तिलेश्वर साहू कुछ अन्य लोगों के साथ कार्यालय परिसर में बैठकर शराब सेवन करते दिखाई दे रहे हैं। वायरल वीडियो में यह भी देखा जा सकता है कि कार्यालय की सरकारी आलमारी, जहां सामान्यतः महत्वपूर्ण दस्तावेज और अभिलेख रखे जाते हैं, उसमें शराब की बोतलें रखी जा रही हैं। इसके बाद कर्मचारियों और अन्य लोगों के साथ जाम छलकाने का दृश्य भी कैमरे में कैद हुआ है।

सरकारी कार्यालय में शराबखोरी से उठे गंभीर सवाल

सरकारी कार्यालयों को प्रशासनिक कार्यों और सार्वजनिक हित से जुड़े दस्तावेजों के संरक्षण के लिए स्थापित किया जाता है। ऐसे में कार्यालय परिसर के भीतर शराब सेवन और सरकारी संसाधनों का कथित रूप से निजी उपयोग न केवल सेवा नियमों का उल्लंघन माना जाता है, बल्कि यह सरकारी संस्थानों की साख पर भी सवाल खड़ा करता है।


विभागीय जिम्मेदारी पर भी उठ रहे प्रश्न

मामले को लेकर जब जिला विपणन अधिकारी (डीएमओ) से संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो उन्होंने स्वयं के अवकाश पर होने की बात कही। आरोप है कि उन्होंने विस्तृत सवाल सुने बिना ही फोन कॉल समाप्त कर दिया। इसके बाद विभाग की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

हालांकि, किसी भी मामले में संबंधित अधिकारी का पक्ष महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में विभागीय जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि वायरल वीडियो कब का है, उसमें दिखाई दे रहे लोग कौन हैं और क्या वास्तव में सरकारी कार्यालय परिसर में शराब पार्टी आयोजित की गई थी।

जांच और कार्रवाई की मांग

वीडियो वायरल होने के बाद स्थानीय स्तर पर मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठने लगी है। लोगों का कहना है कि यदि सरकारी कार्यालयों में इस तरह की गतिविधियां हो रही हैं तो यह प्रशासनिक व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है।

अब सभी की नजर जिला प्रशासन और विपणन विभाग पर है कि वायरल वीडियो की सत्यता की जांच कर संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह मामला विभागीय अनुशासन और जवाबदेही की बड़ी परीक्षा साबित हो सकता है।



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