पब्लिक स्वर,बलौदाबाजार। बलौदाबाजार जिला के पलारी थाना क्षेत्र के छेरकाडीह जारा गांव में एक 4 महीने की गर्भवती महिला की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। बताया जा रहा है कि महिला सर्दी-खांसी का इलाज कराने गांव के एक झोलाछाप डॉक्टर के पास गई थी जहाँ इलाज के दौरान उसकी तबीयत अचानक बिगड़ गई जिसके बाद अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
क्या है पूरा मामला?
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक अजय साहू की पत्नी इंदु साहू (शादी 2022 में हुई थी) ढाई साल के एक बेटे की मां थीं और दूसरी बार गर्भवती थीं इस बीच गुरुवार को उन्हें सर्दी-खांसी और सीने में दर्द की शिकायत थी। जिसके कारण वे गांव के ही बिना डिग्री वाले डॉक्टर जयंत साहू के क्लिनिक पहुंचीं, जो गांव का सरपंच भी है। परिजनों के मुताबिक, पहली बार क्लिनिक पहुंचने पर डॉक्टर मौजूद नहीं था, इसलिए वह घर लौट आईं। बाद में डॉक्टर के आने की सूचना मिलने पर दोबारा इलाज के लिए गईं।
इलाज के दौरान क्या हुआ?
डॉक्टर जयंत साहू कि माने तो महिला ने सुबह से खाना नहीं खाया था जिसके बाद उनका बीपी चेक किया गया। डॉक्टर का कहना है कि महिला करीब 15–20 मिनट क्लिनिक में रुकी थीं। इसी दौरान अचानक उन्हें उल्टियां शुरू हो गईं और चक्कर खाकर गिर पड़ीं। प्रत्यक्षदर्शियों का दावा है कि इंजेक्शन लगाने के बाद महिला की तबीयत बिगड़ी। हालांकि, कैमरे पर कोई बयान देने को तैयार नहीं है। वही दूसरी ओर महिला की सास कांति साहू के अनुसार, जब बहू देर तक घर नहीं लौटी तो वे क्लिनिक पहुंचीं। वहां इंदु अपने पति की गोद में अचेत अवस्था में थीं। इसके बाद उन्हें तुरंत पलारी के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया।
अस्पताल में क्या हुआ?
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पलारी के बीएमओ डॉ. पंकज वर्मा ने बताया कि दोपहर करीब 2 बजे महिला को अस्पताल लाया गया था, लेकिन जांच में पाया गया कि उसकी मौत अस्पताल पहुंचने से पहले ही हो चुकी थी। महिला के नाक से झाग और खून निकल रहा था। इस दौरान परिवार के लोग करीब चार घंटे तक अस्पताल में मौजूद रहे। शाम 6 बजे उन्होंने पोस्टमार्टम न कराने का लिखित आवेदन दिया, जिसके बाद शव उन्हें सौंप दिया गया। उसी दिन अंतिम संस्कार भी कर दिया गया।
झोलाछाप डॉक्टर का बयान
जयंत साहू ने स्वीकार किया है कि उनके पास कोई मेडिकल डिग्री नहीं है, लेकिन वे पिछले 17 साल से इलाज कर रहे हैं। घटना के समय वह भी महिला को अस्पताल लेकर गया था। इस मामले में परिजनों ने न तो थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई है और न ही किसी प्रकार की कानूनी कार्रवाई की गई है। पुलिस की ओर से भी स्वतः संज्ञान लेने की कोई जानकारी सामने नहीं आई है।

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