अभनपुर post authorUser 1 11 February 2026

नवापारा में चारागाह की 130 एकड़ भूमि पर कब्जा जमा कर बेचने का प्लान,अब ग्रामीणों ने खोला मोर्चा



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पब्लिक स्वर,नवापारा/राजिम। समीपस्थ ग्राम पंचायत जौन्दी की चारागाह (शामलात) भूमि को कुछ लोगों द्वारा फौती नामांतरण कर बेचने की कोशिश किए जाने का मामला सामने आने के बाद पूरे गांव में आक्रोश फैल गया। ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने एकजुट होकर इस प्रयास का कड़ा विरोध किया और प्रशासन से शिकायत कर फौती नामांतरण दर्ज न करने की मांग की है।

जानकारी के अनुसार ग्राम जौन्दी में लगभग 130 एकड़ भूमि संत विनोबा भावे आंदोलन के दौरान वर्ष 1950 के आसपास बड़े एवं छोटे किसानों द्वारा चारागाह के लिए दान में दी गई थी। यह भूमि आज भी राजस्व रिकॉर्ड में सम्मिलात चारागाह के रूप में दर्ज है, लेकिन भू-स्वामी कॉलम में केवल तीन परिवारों के आठ सदस्यों के नाम दर्ज हैं।

इनमें से सात व्यक्तियों की मृत्यु हो चुकी है और केवल भरत साहू जीवित हैं। मृतकों के वारिसों द्वारा बहनों को बुलाकर उक्त भूमि का फौती नामांतरण कराकर बिक्री की तैयारी की जा रही थी। जैसे ही इसकी भनक ग्राम पंचायत को लगी, पंचायत ने तत्काल बैठक बुलाकर सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया कि चारागाह भूमि का फौती नामांतरण किसी भी स्थिति में नहीं किया जाए।

51.93 हेक्टेयर बहुमूल्य भूमि पर नजर जिस भूमि को बेचने की तैयारी की जा रही थी, वह जौन्दी से चम्पारण मुख्य मार्ग के दोनों ओर स्थित है और अत्यंत बहुमूल्य मानी जाती है। संबंधित खसरा नंबर इस प्रकार हैं – खसरा नं. 115, 117, 118, 130, 131, 191, 1164 एवं 1165, कुल रकबा 51.93 हेक्टेयर।

प्रशासन को सौंपा गया ज्ञापन ग्राम पंचायत जौन्दी की सरपंच कुन्ती साहू तथा भाजपा नेता व पूर्व सरपंच टीकमचंद साहू के नेतृत्व में उपसरपंच पोखन यदु, पंचगण एवं बड़ी संख्या में ग्रामीण आज तहसीलदार, एसडीएम और कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और लिखित शिकायत आवेदन सौंपा। ग्रामीणों ने मांग की कि चारागाह भूमि को निजी संपत्ति के रूप में दर्ज करने की प्रक्रिया तुरंत रोकी जाए और भूमि को सुरक्षित किया जाए।


अधिकारियों ने लिया संज्ञान

प्रशासनिक अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों को तत्काल आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यह भूमि पूरे गांव की है और पशुओं के चराई व सार्वजनिक उपयोग के लिए सुरक्षित रहनी चाहिए। यदि इसे बेच दिया गया तो गांव के पशुपालकों और भविष्य की पीढ़ियों को भारी नुकसान होगा।



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