पब्लिक स्वर। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने 12 जनवरी को एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की। आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन स्पेस सेंटर से सुबह 10:17 बजे IST पर PSLV-C62 रॉकेट को सफलतापूर्वक लॉन्च किया गया। यह मिशन सिर्फ एक सामान्य लॉन्च नहीं, बल्कि भारत की रक्षा और निगरानी क्षमताओं को नई ऊंचाई पर ले जाने वाला अहम कदम है।
PSLV-C62 के जरिए कुल 16 सैटेलाइट्स को सन-सिंक्रोनस पोलर ऑर्बिट में स्थापित किया गया। इनमें सबसे महत्वपूर्ण सैटेलाइट EOS-N1, जिसे ‘अन्वेषा’ नाम दिया गया है। यह डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (DRDO) द्वारा विकसित एक एडवांस्ड अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट है।
क्या है ‘अन्वेषा’ की खासियत?
अन्वेषा एक अत्याधुनिक हाइपरस्पेक्ट्रल इमेजिंग सैटेलाइट है। सामान्य कैमरे या मानव आंख जहां सिर्फ लाल, हरा और नीला रंग देख पाती है, वहीं हाइपरस्पेक्ट्रल सेंसर सैकड़ों सूक्ष्म स्पेक्ट्रल बैंड कैप्चर करता है। इससे ऐसे बदलाव और वस्तुएं भी दिख जाती हैं, जो सामान्य तस्वीरों में नजर नहीं आतीं।
सेना और सुरक्षा एजेंसियों को कैसे फायदा?
अन्वेषा से भारतीय सेना को रीयल-टाइम और सटीक खुफिया जानकारी मिल सकेगी।
छिपे ठिकानों की पहचान: जंगल, पहाड़ या मिट्टी में छिपाए गए हथियार, टैंक या वाहन कैमोफ्लाज के बावजूद पकड़े जा सकेंगे।
रणनीतिक निगरानी: सीमावर्ती इलाकों में नई सड़कें, निर्माण या सैनिक गतिविधियों का तुरंत पता चलेगा।
तेज निर्णय: जो जानकारी पहले हफ्तों में मिलती थी, अब मिनटों में उपलब्ध होगी, जिससे ऑपरेशन की गति और सटीकता बढ़ेगी।
पाकिस्तान और चीन पर रखेगा पैनी नजर
पाकिस्तान सीमा (LOC/IB): जम्मू-कश्मीर और पंजाब क्षेत्रों में घुसपैठ, आतंकी कैंप और सैन्य हलचल की पहचान आसान होगी।
चीन सीमा (LAC): लद्दाख और अरुणाचल जैसे दुर्गम इलाकों में छिपे निर्माण, टेंट और सैन्य वाहनों को ट्रैक किया जा सकेगा। इससे गलवान जैसी घटनाओं से पहले चेतावनी मिल सकती है।
देश के अंदर सुरक्षा में भी मदद
अन्वेषा नक्सल प्रभावित इलाकों में भी अहम भूमिका निभाएगा। छत्तीसगढ़, झारखंड और ओडिशा के जंगलों में छिपे नक्सली कैंप, बंकर, हथियार और अवैध गतिविधियों का पता लगाने में यह पुलिस और सुरक्षा बलों के लिए उपयोगी होगा। साथ ही ड्रग तस्करी, अवैध खनन और स्मगलिंग जैसी गतिविधियों पर भी नजर रखी जा सकेगी।
बहु-उपयोगी सैटेलाइट
हालांकि अन्वेषा का मुख्य फोकस राष्ट्रीय सुरक्षा है, लेकिन इसका उपयोग कृषि निगरानी, पर्यावरण अध्ययन और आपदा प्रबंधन में भी किया जा सकेगा।
कुल मिलाकर, अन्वेषा सैटेलाइट भारत की “अंतरिक्ष में आंख” बनकर काम करेगा। यह न सिर्फ दुश्मनों की गतिविधियों पर नजर रखेगा, बल्कि देश की रक्षा रणनीति को और मजबूत बनाते हुए भारत को वैश्विक स्तर पर एक सशक्त अंतरिक्ष शक्ति के रूप में स्थापित करेगा।

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