देश post authorUser 1 02 January 2026

घर बैठे मिलेंगे जमीन के कागजात, 19 राज्यों में लैंड रिकॉर्ड पूरी तरह डिजिटल



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पब्लिक स्वर,रायपुर/दिल्ली। देश में जमीन से जुड़े काम अब पहले से कहीं ज्यादा आसान, तेज और पारदर्शी होने जा रहे हैं। केंद्र सरकार ने लैंड रिकॉर्ड को डिजिटल बनाने की दिशा में बड़ा काम पूरा कर लिया है। अब देश के 19 राज्यों के नागरिक अपने जमीन के कागजात घर बैठे ऑनलाइन डाउनलोड कर सकेंगे। ये डिजिटल दस्तावेज कानूनी रूप से पूरी तरह मान्य होंगे।

सरकार की इस पहल से सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि लोगों को जमीन से जुड़े कामों के लिए दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। जमीन के कागजात, नक्शे और रजिस्ट्रेशन से जुड़ी जानकारी अब ऑनलाइन उपलब्ध होगी।


लोन प्रक्रिया भी होगी तेज

इस डिजिटल व्यवस्था का फायदा बैंकों को भी मिलेगा। देश के 406 जिलों में बैंक अब ऑनलाइन ही जमीन गिरवी (मॉर्गेज) से जुड़ी जानकारी की जांच कर सकेंगे। इससे होम लोन और अन्य कर्ज जल्दी मंजूर हो सकेंगे।


गांवों में लगभग पूरा हुआ डिजिटल काम

ग्रामीण विकास मंत्रालय के अनुसार, देश के 97 प्रतिशत से ज्यादा गांवों में जमीन के अधिकार से जुड़े रिकॉर्ड कंप्यूटर पर दर्ज हो चुके हैं। वहीं, करीब 97 प्रतिशत जमीन के नक्शे भी डिजिटल बनाए जा चुके हैं। लगभग 85 प्रतिशत गांवों में जमीन के लिखित रिकॉर्ड को नक्शों से आपस में जोड़ दिया गया है, जिससे गड़बड़ी और विवाद की संभावना कम होगी।


शहरों के लिए ‘नक्शा’ योजना

शहरी इलाकों में जमीन की व्यवस्था सुधारने के लिए केंद्र सरकार ने ‘नक्शा’ (N-AKSHA) योजना शुरू की है। इसके तहत देश के 157 शहरी स्थानीय निकायों में काम चल रहा है। इनमें से 116 शहरों में हवाई सर्वे पूरा हो चुका है, जिसमें हाई-रिजॉल्यूशन तस्वीरों के जरिए करीब 5,915 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को कवर किया गया है।

72 शहरों में जमीनी जांच शुरू हो चुकी है, जबकि 21 शहरों में यह काम पूरी तरह पूरा हो चुका है।


राज्यों को 1,050 करोड़ की मदद

केंद्र सरकार ने 2025-26 की योजना के तहत 24 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को 1,050 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता मंजूर की है, ताकि जमीन के डिजिटल रिकॉर्ड का काम पूरी तरह पूरा किया जा सके।


जमीन का ‘आधार कार्ड’ – ULPIN

सरकार ने जमीन के लिए एक खास पहचान संख्या भी शुरू की है, जिसे ULPIN कहा जाता है। यह 14 अंकों की यूनिक संख्या होती है, जिसे जमीन का आधार कार्ड माना जा रहा है। नवंबर 2025 तक देश के 29 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 36 करोड़ से ज्यादा जमीन के टुकड़ों को यह नंबर दिया जा चुका है।


खरीद-बिक्री भी होगी आसान

राष्ट्रीय दस्तावेज पंजीकरण प्रणाली (NGDRS) लागू होने से जमीन की खरीद-बिक्री और रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया भी आसान हो गई है। यह सिस्टम पंजाब, महाराष्ट्र और हिमाचल प्रदेश समेत 17 राज्यों में लागू हो चुका है।

करीब 88 प्रतिशत सब-रजिस्ट्रार कार्यालय अब राजस्व विभाग से जुड़ चुके हैं, जिससे रजिस्ट्रेशन के तुरंत बाद जमीन का रिकॉर्ड अपने आप अपडेट हो जाता है।


क्या बदलेगा आम लोगों के लिए?

सरकार का कहना है कि इन सभी कदमों से जमीन से जुड़े काम अब पारदर्शी होंगे, धोखाधड़ी कम होगी और लोगों का समय व पैसा दोनों बचेंगे। जमीन के कागजात, लोन, रजिस्ट्रेशन और विवाद निपटारे की प्रक्रिया पहले से कहीं ज्यादा सरल हो जाएगी।



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