पब्लिक स्वर,भानुप्रतापपुर/कांकेर। कांकेर जिले के भानुप्रतापपुर और दुर्गूकोंदल विकासखंड में पंचायत प्रतिनिधियों और जिला प्रशासन के बीच टकराव की स्थिति बनती नजर आ रही है। विकास कार्यों में स्थानीय जनप्रतिनिधियों की अनदेखी और बाहरी ठेकेदारों को प्राथमिकता दिए जाने के आरोपों को लेकर जनपद सदस्य और सरपंच खुलकर विरोध में उतर आए हैं। नाराज जनप्रतिनिधियों ने एसडीएम भानुप्रतापपुर को ज्ञापन सौंपते हुए 10 दिनों के भीतर मांगें पूरी नहीं होने पर ग्राम पंचायत और जनपद पंचायत कार्यालयों में तालाबंदी करने की चेतावनी दी है।
बैठक में बनी रणनीति, कई प्रस्ताव पारित
भानुप्रतापपुर और दुर्गूकोंदल विकासखंड के जनपद सदस्यों और सरपंचों की संयुक्त बैठक में पंचायत अधिकारों और स्थानीय विकास को लेकर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में यह आरोप लगाया गया कि क्षेत्र में चल रहे कई निर्माण कार्यों में स्थानीय पंचायत प्रतिनिधियों को दरकिनार कर बाहरी ठेकेदारों को काम सौंपा जा रहा है, जिससे ग्रामीण विकास की मूल भावना प्रभावित हो रही है।
जनप्रतिनिधियों का कहना है कि माइंस प्रभावित क्षेत्रों के विकास के लिए मिलने वाली डीएमएफ (जिला खनिज न्यास) राशि का उपयोग स्थानीय जरूरतों के अनुसार होना चाहिए और निर्माण कार्यों की स्वीकृति स्थानीय पंचायतों के माध्यम से दी जानी चाहिए। उनका तर्क है कि पंचायत प्रतिनिधि गांव की वास्तविक समस्याओं और प्राथमिकताओं को बेहतर तरीके से समझते हैं।
बाहरी ठेकेदारी पर रोक और CSR राशि पंचायतों को देने की मांग
बैठक में सबसे प्रमुख मुद्दा बाहरी ठेकेदारी प्रथा का रहा। जनप्रतिनिधियों ने मांग की कि पंचायत क्षेत्रों में होने वाले विकास कार्य स्थानीय स्तर पर कराए जाएं, ताकि रोजगार और आर्थिक लाभ स्थानीय लोगों को मिल सके। इसके साथ ही कंपनियों की CSR (कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी) राशि सीधे ग्राम पंचायतों में खर्च किए जाने की मांग भी उठाई गई। प्रतिनिधियों का कहना है कि उद्योग और खनन गतिविधियों का असर गांवों पर पड़ता है, इसलिए CSR की राशि का उपयोग भी ग्रामीण क्षेत्रों की बुनियादी सुविधाओं पर होना चाहिए।
सामान्य सभा की अनुमति के बाद ही बने प्राक्कलन
जनप्रतिनिधियों ने यह भी मांग रखी कि किसी भी निर्माण कार्य का प्राक्कलन (एस्टीमेट) तैयार करने से पहले उसे जनपद पंचायत की सामान्य सभा से अनुमोदित कराया जाए। उनका कहना है कि इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और विकास योजनाओं में स्थानीय भागीदारी सुनिश्चित होगी।
इसके अलावा गौण खनिज से प्राप्त राजस्व का हिस्सा ग्राम पंचायतों को देने की मांग भी प्रमुख रूप से उठाई गई। पंचायत प्रतिनिधियों का कहना है कि खनिज संसाधनों का उपयोग उनके क्षेत्रों में हो रहा है, इसलिए उससे मिलने वाली आय का लाभ भी गांवों को मिलना चाहिए।
10 दिन का अल्टीमेटम, आंदोलन की चेतावनी
जनप्रतिनिधियों ने प्रशासन को 10 दिनों का समय देते हुए स्पष्ट कहा है कि यदि मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो 11वें दिन पंचायत कार्यालयों में तालाबंदी कर आंदोलन शुरू किया जाएगा। जनपद पंचायत अध्यक्ष ने कहा, “हमारी मांग है कि स्थानीय पंचायत प्रतिनिधियों को विकास कार्यों में प्राथमिकता दी जाए। बाहरी ठेकेदारी बंद हो और पंचायतों के अधिकार पंचायतों को मिलें। यदि 10 दिनों के भीतर मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।”

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