पब्लिक स्वर,अभनपुर/महासमुंद। महासमुंद जिले में सामने आया एलपीजी गैस घोटाला अब प्रदेश के बड़े आर्थिक अपराधों में गिना जा रहा है। करीब 92 हजार किलो (लगभग 90 मीट्रिक टन) गैस की चोरी के इस मामले में “पब्लिक स्वर BIG IMPACT" के तहत लगातार रिपोर्टिंग और स्टिंग ऑपरेशन के जरिए किए गए खुलासों ने जांच को निर्णायक मोड़ दिया।
दरअसल, पब्लिक स्वर समाचार पत्र ने पहले ही गैस की कालाबाज़ारी को लेकर लगातार खबरें प्रकाशित की थीं, जिसके बाद अपने स्टिंग ऑपरेशन में इस पूरे खेल का पर्दाफाश किया गया। इसके बाद प्रशासन और पुलिस हरकत में आए और जांच तेज की गई, जिसमें अब करीब 1.5 करोड़ रुपये की हेराफेरी सामने आई है।
मास्टरमाइंड संतोष ठाकुर
जांच एजेंसियों के अनुसार, ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स अभनपुर-उरला के संचालक संतोष ठाकुर को इस पूरे रैकेट का कथित मास्टरमाइंड माना जा रहा है। इसके साथ ही डायरेक्टर सार्थक ठाकुर और प्लांट मैनेजर निखिल वैष्णव की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है। बतादे कि अब तक निखिल वैष्णव को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।
GPS डेटा से खुली साजिश
सूत्रों की माने तो जांच में तकनीकी साक्ष्य सबसे अहम साबित हुए। कैप्सूल वाहनों में लगे GPS सिस्टम से यह सामने आया कि गैस को योजनाबद्ध तरीके से अलग-अलग दिनों में निकाला गया: जिसमें 31 मार्च: 2 कैप्सूल, 1 अप्रैल: 1 कैप्सूल, 3 अप्रैल: 1 कैप्सूल, 5 अप्रैल: 2 कैप्सूल इस तरह कुल 6 कैप्सूल से 92 हजार किलो LPG गैस की अवैध निकासी को अंजाम दिया गया।
रिकॉर्ड में गड़बड़ी ने खोली पोल
वही दूसरी ओर दस्तावेजों की जांच में पाया गया कि: अप्रैल में खरीद लगभग 47 टन और शुरुआती स्टॉक शून्य था लेकिन दर्ज बिक्री में 107 टन से अधिक था यह भारी अंतर साफ तौर पर अवैध सप्लाई और कालाबाज़ारी की ओर इशारा करता है।
कैसे चलता था रैकेट?
जांच के दौरान पूछताछ में कर्मचारियों ने स्वीकार किया कि कैप्सूल वाहनों से गैस निकालकर प्लांट के बुलेट टैंक में डाली जाती थी इसके बाद निजी टैंकरों के जरिए ट्रांसफर और फिर अलग-अलग जगहों पर कच्चे चालान के जरिए रायपुर और आसपास के क्षेत्रों में 4 से 6 टन गैस बिना पक्के बिल के खपाने की जानकारी सामने आई है।
सुपुर्दनामा सिस्टम पर सवालिया निशान
सूत्रों से पुख्ता जानकारी सामने आई है कि इस मामले में जिन कैप्सूल वाहनों का इस्तेमाल हुआ, वे पहले प्रशासन द्वारा सुपुर्दनामा में सुरक्षा के लिए दिए गए थे। इन्हीं वाहनों का दुरुपयोग होना निगरानी तंत्र की बड़ी विफलता को दर्शाता है।
गैस संकट में मुनाफाखोरी
जांच में यह भी सामने आया है कि यह पूरा खेल ऐसे समय में किया गया जब गैस की उपलब्धता संवेदनशील थी। आरोपियों ने इस स्थिति का फायदा उठाकर अवैध रूप से भारी मुनाफा कमाया। फिलहाल अब पुलिस इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि: अवैध गैस किन-किन जगहों पर सप्लाई की गई, इस रैकेट में और कौन-कौन शामिल हैं और क्या इसका नेटवर्क अन्य जिलों तक फैला हुआ है।

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