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धमतरी post authorUser 1 28 June 2026

धमतरी के जंगल में पहली बार एक साथ दिखे चार संकटग्रस्त ढोल, वन विभाग ने बताया शुभ संकेत



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पब्लिक स्वर,धमतरी। धमतरी स्थित उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व से वन्यजीव संरक्षण के लिहाज से एक उत्साहजनक खबर सामने आई है। अखिल भारतीय बाघ आकलन (All India Tiger Estimation-AITE) 2026 के तहत लगाए गए कैमरा ट्रैप में चार जंगली कुत्तों (ढोल) का एक संगठित झुंड रिकॉर्ड हुआ है। वन विभाग इसे रिजर्व की बेहतर होती पारिस्थितिकी, समृद्ध जैव विविधता और सफल संरक्षण प्रयासों का महत्वपूर्ण संकेत मान रहा है।

कैमरा ट्रैप में कैद तस्वीरों और वीडियो में ढोल का झुंड स्वाभाविक गतिविधियों में नजर आया। अधिकारियों के अनुसार, किसी संरक्षित वन क्षेत्र में इस संकटग्रस्त प्रजाति का एक साथ दिखाई देना इस बात का प्रमाण है कि वहां पर्याप्त शिकार प्रजातियां, सुरक्षित आवास और संतुलित पारिस्थितिकी तंत्र मौजूद है।

क्या है "ढोल"?

ढोल (वैज्ञानिक नाम: Cuon alpinus) भारत के सबसे दुर्लभ और आकर्षक मांसाहारी वन्यजीवों में से एक है। इसे आमतौर पर एशियाई जंगली कुत्ता भी कहा जाता है। यह प्रजाति आईयूसीएन (IUCN) रेड लिस्ट में "संकटग्रस्त" (Endangered) श्रेणी में शामिल है। वहीं, वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची-1 के तहत इसे सर्वोच्च कानूनी संरक्षण प्राप्त है।

पारिस्थितिकी तंत्र के लिए क्यों महत्वपूर्ण हैं ढोल?

ढोल सामाजिक स्वभाव के होते हैं और हमेशा झुंड में रहकर सामूहिक रूप से शिकार करते हैं। इनका मुख्य भोजन चीतल, सांभर और जंगली सूअर जैसे शाकाहारी वन्यजीव होते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, ये शाकाहारी जीवों की आबादी को संतुलित बनाए रखते हैं, जिससे जंगलों में वनस्पतियों का संरक्षण, प्राकृतिक पुनर्जनन और पूरे पारिस्थितिकी तंत्र का संतुलन बना रहता है। यही कारण है कि ढोल की मौजूदगी को किसी भी स्वस्थ वन क्षेत्र का महत्वपूर्ण संकेतक माना जाता है।

संरक्षण प्रयासों का दिख रहा असर

उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के उप निदेशक ने बताया कि कैमरा ट्रैप में ढोल के झुंड का रिकॉर्ड होना पिछले कुछ वर्षों में किए गए आवास पुनर्स्थापना (Habitat Restoration), वन्यजीव संरक्षण और प्रभावी वन प्रबंधन का सकारात्मक परिणाम है। इससे यह भी संकेत मिलता है कि रिजर्व में जैव विविधता लगातार मजबूत हो रही है।

लोगों से वन विभाग की अपील

वन विभाग ने आम लोगों से अपील की है कि वे जंगल और उसके आसपास के क्षेत्रों में अनावश्यक रूप से प्रवेश न करें तथा वन्यजीवों से सुरक्षित दूरी बनाए रखें। अधिकारियों का कहना है कि मानवीय हस्तक्षेप कम होने से वन्यजीव अपने प्राकृतिक व्यवहार के साथ सुरक्षित वातावरण में रह पाते हैं, जो संरक्षण के लिए बेहद आवश्यक है।



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