मृत्यु के बाद भी अमर होकर जगाएंगे शिक्षा की अलख: बचेली के अलख राम साहू ने देहदान कर रचा प्रेरणा का इतिहास

अंतिम इच्छा का सम्मान करते हुए परिजनों ने मेडिकल शिक्षा हेतु किया देहदान, समाज ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि



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पब्लिक स्वर,बचेली। मानव सेवा और समाजहित की अद्भुत मिसाल पेश करते हुए बचेली निवासी स्वर्गीय अलख राम साहू ने मृत्यु के बाद भी शिक्षा और चिकित्सा जगत के लिए प्रेरणा छोड़ दी। हृदयाघात से निधन के पश्चात उनकी पूर्व घोषित अंतिम इच्छा को पूरा करते हुए परिजनों ने उनका पार्थिव शरीर मेडिकल शिक्षा एवं शोध कार्य हेतु दान कर दिया। उनका देहदान रुंगटा डेंटल एंड रिसर्च कॉलेज भिलाई को सौंपा गया।

स्वर्गीय अलख राम साहू बचेली के पिंटू पारा निवासी थे। वर्तमान में वे बालोद जिले के गुंडरदेही विकासखंड अंतर्गत ग्राम कुरदी में निवासरत थे। वे ठेकेदारी कार्य से जुड़े हुए थे और बचेली क्षेत्र में अपनी मेहनत, सरल व्यवहार और सामाजिक सक्रियता के कारण काफी परिचित थे। उनके परिवार में तीन पुत्र हैं।

बताया गया कि उन्होंने जीवित रहते हुए ही अपनी मृत्यु के बाद देहदान करने की घोषणा की थी। उनके निधन के बाद परिवारजनों ने उनकी इस अंतिम इच्छा का सम्मान करते हुए आशा बहुउद्देशीय कल्याण संस्था भिलाई को इसकी सूचना दी। संस्था के सदस्यों ने विधि-विधान के साथ अंतिम प्रक्रिया पूर्ण कर पार्थिव शरीर मेडिकल कॉलेज के लिए रवाना किया।

इस पुनीत कार्य की समाज के विभिन्न वर्गों द्वारा सराहना की जा रही है। मेडिकल कॉलेज के डीन ने भी परिजनों के इस निर्णय के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार का देहदान मेडिकल शिक्षा एवं शोध कार्य में महत्वपूर्ण योगदान देता है और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बनता है।

ज्ञात हो कि स्वर्गीय अलख राम साहू गुंडरदेही तहसील साहू समाज के उपाध्यक्ष भी रह चुके थे। वहीं बस्तर अंचल के बचेली क्षेत्र में भी वे सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाने के कारण अपनी अलग पहचान रखते थे। समाजसेवा, मिलनसार स्वभाव और जरूरतमंदों के प्रति संवेदनशीलता के कारण वे लोगों के बीच बेहद लोकप्रिय थे।

उनके निधन से ग्राम कुरदी सहित आसपास के क्षेत्रों में शोक की लहर है। उनसे जुड़े लोगों ने उन्हें जिंदादिल, सरल और हर सुख-दुख में साथ खड़े रहने वाला व्यक्तित्व बताया। लोगों का कहना है कि उनके जाने से समाज ने एक सच्चा समाजसेवी और संवेदनशील इंसान खो दिया, जिसकी कमी कभी पूरी नहीं हो सकेगी।

बचेली क्षेत्र में भी उनके इस प्रेरणादायी देहदान की लोग खुलकर सराहना कर रहे हैं। लोगों का मानना है कि मृत्यु के बाद भी समाज और शिक्षा के लिए योगदान देना मानवता की सबसे बड़ी सेवा है।



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