पब्लिक स्वर,धमतरी। धमतरी जिले का एक गांव आज ऐसी सामाजिक त्रासदी से गुजर रहा है, जहां अवैध शराब ने सिर्फ कानून व्यवस्था को नहीं, बल्कि पूरे सामाजिक ढांचे को प्रभावित कर दिया है। कुरूद विकासखंड का ग्राम कल्ले पिछले करीब 10 वर्षों से अवैध शराब कारोबार की गिरफ्त में है। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि अब इस गांव के युवाओं के विवाह तक प्रभावित होने लगे हैं। गांव की पहचान खेती, संस्कृति या विकास से नहीं, बल्कि “शराब वाले गांव” के रूप में होने लगी है।
ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में खुलेआम अवैध शराब की बिक्री हो रही है। गलियों में दिन-रात नशे में धुत लोगों का जमावड़ा लगा रहता है। गाली-गलौज, विवाद और अभद्र व्यवहार आम हो चुका है। इसका सबसे बड़ा असर गांव के युवाओं और युवतियों के भविष्य पर पड़ रहा है।
“इस गांव में बेटी नहीं देंगे…”
कल्ले गांव के माता-पिता अब सामाजिक अपमान और चिंता के बीच जीवन गुजार रहे हैं। ग्रामीणों के मुताबिक, जब वे अपने बेटों के लिए दूसरे गांवों में रिश्ता लेकर जाते हैं तो सामने से साफ जवाब मिलता है—
“जिस गांव में शराब का इतना बोलबाला हो, वहां बेटी नहीं भेज सकते।”
स्थिति सिर्फ लड़कों तक सीमित नहीं है। गांव में जब बाहर से लोग लड़कियां देखने आते हैं, तब भी गांव की छवि देखकर रिश्ते से इनकार कर देते हैं। परिणाम यह है कि कई युवक-युवतियों की शादी की उम्र निकलती जा रही है और परिवारों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। यह मामला केवल अवैध शराब बिक्री का नहीं, बल्कि एक गांव की सामाजिक प्रतिष्ठा और आने वाली पीढ़ी के भविष्य का बन चुका है।
10 साल से जारी है अवैध कारोबार
ग्रामीणों का कहना है कि गांव में पिछले एक दशक से अवैध शराब का कारोबार चल रहा है। कई बार पुलिस और आबकारी विभाग से शिकायत की गई, लेकिन कार्रवाई केवल औपचारिकता बनकर रह गई। आरोप है कि शराब बेचने वालों के हौसले इतने बुलंद हैं कि वे बिना किसी डर के कारोबार चला रहे हैं। गांव के लोगों का मानना है कि अगर समय रहते इस पर सख्ती नहीं हुई, तो आने वाले वर्षों में गांव का सामाजिक ताना-बाना पूरी तरह टूट सकता है।
कलेक्ट्रेट पहुंचे ग्रामीण, आंदोलन की चेतावनी
समस्या से परेशान होकर बड़ी संख्या में ग्रामीण जिला मुख्यालय पहुंचे और कलेक्टर कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई। सरपंच जया संदीप डहरिया, ग्रामीण भागीराम साहू, स्मृति यादव समेत अन्य लोगों ने प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे सड़क पर उतरकर आंदोलन, धरना और चक्काजाम करेंगे।
प्रशासन ने क्या कहा?
मामले में अपर कलेक्टर इंदिरा नवीन सिंह ने कहा कि ग्रामीणों की शिकायत प्राप्त हुई है। आवेदन को एसपी कार्यालय भेजा जाएगा और दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
सामाजिक संकट बनता जा रहा नशा
ग्रामीण भारत में शराब की समस्या केवल स्वास्थ्य या कानून व्यवस्था तक सीमित नहीं रहती, बल्कि इसका असर परिवार, शिक्षा, रोजगार और सामाजिक रिश्तों तक पहुंचता है। कल्ले गांव इसका जीवंत उदाहरण बनता जा रहा है, जहां शराब की वजह से विवाह जैसे सामाजिक संबंध भी प्रभावित हो रहे हैं। अब देखने वाली बात होगी कि प्रशासन इस मामले में केवल आश्वासन देता है या वास्तव में गांव को अवैध शराब के जाल से बाहर निकालने के लिए ठोस कदम उठाए जाते हैं।

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