पब्लिक स्वर,गरियाबंद। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की संसाधनों के सीमित उपयोग और सोना खरीदने में संयम बरतने की अपील का असर अब सामाजिक और धार्मिक क्षेत्र में भी दिखाई देने लगा है। छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध कथावाचक पंडित युवराज पांडेय ने अपने काफिले के वाहनों में कटौती करने और एक साल तक सोना नहीं खरीदने का निर्णय लिया है। उन्होंने अपने अनुयायियों से भी उन्हें सोना भेंट नहीं करने की अपील की है।
गरियाबंद जिले के देवभोग में आयोजित श्रीमद्भागवत महापुराण कथा में पहुंचने से पहले पंडित युवराज पांडेय ने अपने सहयोगियों और अनुयायियों के साथ बैठक की। इस दौरान उन्होंने अनावश्यक वाहनों के उपयोग को कम करने और ईंधन की बचत करने पर जोर दिया। इसके बाद कथा स्थल पर उनके काफिले में पहले की तुलना में काफी कम वाहन नजर आए। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब वे केवल एक वाहन से यात्रा करेंगे।
दरअसल, हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हैदराबाद में आयोजित एक जनसभा में देशवासियों से सोना खरीदने में संयम बरतने, विदेश यात्राएं कम करने और पेट्रोल-डीजल की बचत करने की अपील की थी। प्रधानमंत्री ने इसे देश की आर्थिक मजबूती और संसाधनों के संतुलित उपयोग से जोड़कर देखा था। इसी अपील के समर्थन में पंडित युवराज पांडेय ने यह पहल की है।
पंडित युवराज पांडेय ने कहा कि प्रधानमंत्री यदि कोई अपील करते हैं तो उसके पीछे निश्चित रूप से देशहित जुड़ा होता है। उन्होंने इसे केवल सरकारी संदेश नहीं बल्कि “देशभक्ति से जुड़ा दायित्व” बताया। उनका कहना है कि धार्मिक और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोगों को खुद उदाहरण पेश करना चाहिए, ताकि समाज में सकारात्मक संदेश जाए।
उन्होंने कहा कि केवल दिखावे के लिए लंबे वाहन काफिले निकालना उचित नहीं है। जहां संभव हो वहां पैदल, बाइक या सीमित संसाधनों के साथ यात्रा की जानी चाहिए। उन्होंने विधायकों, सांसदों, मंत्रियों और अन्य जनप्रतिनिधियों से भी अपने काफिलों में वाहनों की संख्या कम करने की अपील की।
सोना नहीं खरीदने के फैसले को लेकर पंडित युवराज पांडेय ने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए जरूरत के अनुसार ही खरीदारी होनी चाहिए। उन्होंने अपने अनुयायियों से आग्रह किया कि वे उन्हें सोने के आभूषण या अन्य कीमती उपहार भेंट न करें, बल्कि सामाजिक और धार्मिक कार्यों में सहयोग दें।
सामाजिक संदेश के रूप में देखी जा रही पहल
विशेषज्ञों की मानें तो भारत दुनिया के सबसे बड़े सोना उपभोक्ता देशों में शामिल है। बड़ी मात्रा में सोने का आयात होने से विदेशी मुद्रा पर दबाव बढ़ता है। ऐसे में यदि समाज के प्रभावशाली लोग संयम और सादगी का संदेश देते हैं तो इसका सामाजिक असर भी दिखाई देता है। धार्मिक मंचों से सादगी, संसाधन बचत और जिम्मेदार उपभोग का संदेश देने की यह पहल अब चर्चा का विषय बन गई है। देवभोग में आयोजित कथा कार्यक्रम में भी लोगों के बीच इस फैसले को लेकर सकारात्मक चर्चा देखने को मिली।

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