पब्लिक स्वर,धमतरी। छत्तीसगढ़ का कृषि प्रधान जिला धमतरी अब केवल धान उत्पादन के लिए ही नहीं, बल्कि आधुनिक कृषि भंडारण और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क के लिए भी नई पहचान बनाने की ओर बढ़ रहा है। वर्षों तक फसलों के रिकॉर्ड उत्पादन के बावजूद भंडारण क्षमता की कमी से जूझने वाला यह जिला अब बड़े पैमाने पर वेयरहाउसिंग इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित कर रहा है। राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता महासंघ (NCCF) और छत्तीसगढ़ राज्य भंडारण गृह निगम (SWC) के संयुक्त प्रयासों से जिले में 30 हजार मीट्रिक टन अतिरिक्त वैज्ञानिक भंडारण क्षमता तैयार की जा रही है, जिससे कृषि क्षेत्र, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और व्यापारिक गतिविधियों को नई गति मिलने की उम्मीद है।
रिकॉर्ड उत्पादन के बाद सामने आई थी भंडारण की चुनौती
पिछले कुछ वर्षों में धमतरी जिले में रबी फसलों, विशेषकर चने का उत्पादन और सरकारी उपार्जन लगातार बढ़ा है। हालांकि उत्पादन बढ़ने के साथ ही पर्याप्त गोदामों की कमी बड़ी समस्या बनकर उभरी। स्थानीय स्तर पर भंडारण व्यवस्था पर्याप्त नहीं होने के कारण बड़ी मात्रा में कृषि उपज को अन्य जिलों के गोदामों में भेजना पड़ा। इससे परिवहन लागत बढ़ी और प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर अतिरिक्त दबाव पड़ा। इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन और संबंधित एजेंसियों ने दीर्घकालिक समाधान के रूप में आधुनिक भंडारण अधोसंरचना विकसित करने की योजना तैयार की।
केंद्र की अनाज भंडारण योजना से मिली गति
केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी "विश्व की सबसे बड़ी अनाज भंडारण योजना" के तहत धमतरी जिले की चार प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों (पैक्स) का चयन किया गया है। इनमें अंवरी, कोसमर्रा, पोटियाडीह-आमदी और कोलियारी शामिल हैं। इन चारों समितियों में 2,500-2,500 मीट्रिक टन क्षमता वाले आधुनिक गोदामों का निर्माण तेजी से किया जा रहा है। परियोजना पूरी होने के बाद ग्रामीण स्तर पर ही 10 हजार मीट्रिक टन अतिरिक्त भंडारण सुविधा उपलब्ध हो जाएगी। इससे किसानों को अपनी उपज सुरक्षित रखने के लिए दूसरे क्षेत्रों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
धमतरी और कुरूद में बनेंगे बड़े गोदाम
ग्रामीण गोदामों के अलावा छत्तीसगढ़ राज्य भंडारण गृह निगम द्वारा धमतरी और कुरूद में 10-10 हजार मीट्रिक टन क्षमता वाले दो बड़े गोदाम विकसित किए जा रहे हैं। इस तरह कुल 30 हजार मीट्रिक टन नई क्षमता जुड़ जाएगी। जिले में केंद्रीय भंडारण निगम (CWC) के पास पहले से ही एक लाख मीट्रिक टन से अधिक भंडारण क्षमता मौजूद है। नई परियोजनाओं के बाद धमतरी का भंडारण नेटवर्क प्रदेश के सबसे मजबूत नेटवर्क में शामिल हो सकता है।
चना खरीदी ने दिखाई क्षमता विस्तार की जरूरत
भंडारण क्षमता बढ़ाने की आवश्यकता का अंदाजा हालिया रबी उपार्जन से लगाया जा सकता है। रबी विपणन वर्ष 2026 में जिले के 9,103 किसानों से 1 लाख 16 हजार 162 क्विंटल चने की खरीदी की गई। इसके लिए किसानों को लगभग 60.54 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा रहा है। चना के अलावा सरसों और मसूर की भी उल्लेखनीय खरीदी हुई है। कृषि उत्पादन और सरकारी खरीद में लगातार वृद्धि भविष्य में और अधिक भंडारण क्षमता की मांग पैदा कर सकती है।
धान मिलिंग और व्यापार को मिलेगा बड़ा लाभ
धमतरी लंबे समय से प्रदेश के प्रमुख धान मिलिंग केंद्रों में शामिल रहा है। हालांकि मिलिंग के बाद तैयार चावल और धान के सुरक्षित भंडारण की समस्या अक्सर सामने आती रही है। नई वेयरहाउसिंग क्षमता विकसित होने से न केवल भंडारण दबाव कम होगा, बल्कि मिलिंग गतिविधियों में भी तेजी आएगी।
ब्रॉडगेज रेल लाइन से खुलेगा राष्ट्रीय बाजार का रास्ता
धमतरी के विकास में एक और महत्वपूर्ण कड़ी जल्द शुरू होने वाला ब्रॉडगेज रेल रैक संचालन है। रेल संपर्क मजबूत होने से जिले के चावल, दलहन और अन्य कृषि उत्पादों को देश के बड़े बाजारों तक कम लागत में पहुंचाना संभव होगा। वेयरहाउसिंग और रेल कनेक्टिविटी का यह संयोजन धमतरी को केवल उत्पादन केंद्र नहीं, बल्कि एक उभरते हुए कृषि-व्यापार एवं लॉजिस्टिक्स हब के रूप में स्थापित कर सकता है।
किसानों से लेकर उद्योग तक को मिलेगा फायदा
नई भंडारण परियोजनाओं के पूरा होने के बाद कृषि उपज के बेहतर प्रबंधन, भंडारण हानि में कमी, परिवहन खर्च में बचत और विपणन व्यवस्था में सुधार जैसे कई सकारात्मक परिणाम सामने आ सकते हैं। इससे किसानों की आय बढ़ाने, स्थानीय रोजगार सृजन और व्यापारिक गतिविधियों के विस्तार को भी बल मिलेगा।
धमतरी में विकसित हो रही यह अधोसंरचना इस बात का उदाहरण है कि कृषि क्षेत्र की चुनौतियों का समाधान केवल उत्पादन बढ़ाने से नहीं, बल्कि मजबूत भंडारण और परिवहन नेटवर्क तैयार करने से भी संभव है। यदि योजनाएं तय समय पर पूरी होती हैं, तो आने वाले वर्षों में धमतरी छत्तीसगढ़ के सबसे महत्वपूर्ण कृषि-व्यापार और लॉजिस्टिक्स केंद्रों में अपनी मजबूत पहचान बना सकता है।

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