पब्लिक स्वर,बलौदाबाजार। बलौदाबाजार के बारनवापारा वन्यजीव अभयारण्य में काले हिरणों की वापसी की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। अभयारण्य स्थित ब्लैकबक कंजर्वेशन सेंटर से कुल 34 काले हिरणों को वैज्ञानिक पद्धति से उनके प्राकृतिक आवास में सफलतापूर्वक छोड़ा गया। यह पूरी प्रक्रिया दो चरणों में पूरी की गई, ताकि हिरणों को नए वातावरण में सहज रूप से समायोजित किया जा सके।
वन विभाग के अनुसार, इस वर्ष बारनवापारा अभयारण्य में कुल 60 ब्लैकबक के पुनर्स्थापन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। अभी छोड़े गए 34 काले हिरणों को रामपुर ग्रासलैंड क्षेत्र में मुक्त किया गया, जहां वे पहले से मौजूद काले हिरणों के समूह से जाकर मिल गए हैं। इससे क्षेत्र में इनकी संख्या बढ़ने के साथ-साथ जैव विविधता को भी मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
वैज्ञानिक तरीके से किया गया स्थानांतरण
वन अधिकारियों ने बताया कि ब्लैकबक को प्राकृतिक आवास में छोड़ने की पूरी प्रक्रिया वैज्ञानिक तकनीकों और वन्यजीव प्रबंधन के तय मानकों के अनुसार की गई। हिरणों के स्वास्थ्य, व्यवहार और अनुकूलन क्षमता को ध्यान में रखते हुए उन्हें चरणबद्ध तरीके से जंगल में छोड़ा गया, जिससे उन्हें किसी प्रकार का तनाव या व्यवधान न हो।
विशेषज्ञों के मुताबिक, किसी भी वन्यजीव को उसके प्राकृतिक परिवेश में पुनर्स्थापित करने के दौरान उसकी उम्र, स्वास्थ्य, समूह व्यवहार, भोजन की उपलब्धता और सुरक्षित घासभूमि जैसे पहलुओं का विशेष ध्यान रखा जाता है। बारनवापारा में भी यही प्रक्रिया अपनाई गई, जिसके कारण यह स्थानांतरण सफल माना जा रहा है।
छत्तीसगढ़ में फिर बढ़ रही काले हिरणों की मौजूदगी
काले हिरण, जिन्हें अंग्रेजी में ब्लैकबक कहा जाता है, एक समय छत्तीसगढ़ की धरती से लगभग विलुप्त हो चुके थे। लगातार घटती घासभूमि, शिकार और मानवीय हस्तक्षेप के कारण इनकी संख्या में भारी कमी आई थी। ऐसे में बारनवापारा में चल रहे संरक्षण और पुनर्स्थापन प्रयास वन्यजीव संरक्षण के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
वन विभाग का मानना है कि काले हिरणों की बढ़ती संख्या से न केवल पारिस्थितिकी तंत्र संतुलित होगा, बल्कि घासभूमि आधारित जैव विविधता को भी नया जीवन मिलेगा। ब्लैकबक जैसे शाकाहारी वन्यजीव घासभूमि के संरक्षण में अहम भूमिका निभाते हैं और कई अन्य जीवों के लिए भी अनुकूल वातावरण तैयार करते हैं।
लगातार निगरानी करेगा वन विभाग
वन अधिकारियों ने बताया कि जंगल में छोड़े गए काले हिरणों की नियमित निगरानी की जाएगी। उनकी गतिविधियों, स्वास्थ्य और समूह व्यवहार पर नजर रखी जाएगी, ताकि भविष्य में भी इस तरह के पुनर्स्थापन कार्यक्रमों को और प्रभावी बनाया जा सके।
बारनवापारा वन्यजीव अभयारण्य में काले हिरणों के संरक्षण का कार्य प्रधान मुख्य वन संरक्षक अरुण पांडे के मार्गदर्शन, मुख्य वन संरक्षक वन्यप्राणी सतोविशा समझदार के नेतृत्व और वनमंडलाधिकारी धम्मशील गणवीर के प्रयासों से संचालित किया जा रहा है। वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसी तरह संरक्षण कार्य जारी रहा, तो आने वाले वर्षों में बारनवापारा छत्तीसगढ़ में ब्लैकबक संरक्षण का प्रमुख केंद्र बन सकता है।

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