पब्लिक स्वर की खबर का असर: 92 हजार किलो गैस चोरी में भाजपा नेता का दामाद समेत 4 हिरासत में, मास्टरमाइंड संतोष ठाकुर फरार



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पब्लिक स्वर,अभनपुर/महासमुंद। महासमुंद जिले में सामने आया एलपीजी गैस घोटाला अब प्रदेश के बड़े आसेर्थिक अपराधों में गिना जा रहा है। करीब 92 हजार किलो (लगभग 90 मीट्रिक टन) गैस की चोरी के इस मामले में “पब्लिक स्वर BIG IMPACT” के तहत लगातार रिपोर्टिंग और स्टिंग ऑपरेशन से हुए खुलासों ने जांच को निर्णायक मोड़ दे दिया है। अब तक की जांच में करीब 1.5 करोड़ रुपए की हेराफेरी सामने आई है।

दरअसल, पब्लिक स्वर ने पहले ही गैस की कालाबाज़ारी को लेकर लगातार खबरें प्रकाशित की थीं। बाद में किए गए स्टिंग ऑपरेशन में पूरे रैकेट का खुलासा हुआ, जिसके बाद प्रशासन और पुलिस हरकत में आई। जांच में अब बड़े अधिकारियों, गैस एजेंसी संचालक और प्लांट प्रबंधन की भूमिका सामने आ रही है।

मास्टरमाइंड संतोष ठाकुर, कई बड़े नाम जांच के घेरे में

जांच एजेंसियों के अनुसार ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स अभनपुर-उरला के संचालक संतोष ठाकुर को इस पूरे रैकेट का कथित मास्टरमाइंड माना जा रहा है। डायरेक्टर सार्थक ठाकुर और प्लांट मैनेजर निखिल वैष्णव की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है। निखिल वैष्णव को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि संतोष ठाकुर और सार्थक ठाकुर फरार बताए जा रहे हैं।

इधर पुलिस ने कार्रवाई तेज करते हुए खाद्य अधिकारी अजय यादव, सहायक खाद्य अधिकारी मनीष यादव और गौरव गैस एजेंसी के संचालक पंकज चंद्राकर को भी हिरासत में लिया है। पंकज चंद्राकर भाजपा नेता और पूर्व राज्यमंत्री पूरन चंद्राकर के दामाद बताए जा रहे हैं।

GPS डेटा से खुला पूरा खेल

जांच में तकनीकी साक्ष्य सबसे अहम साबित हुए। गैस कैप्सूल वाहनों में लगे GPS सिस्टम से पता चला कि सुनियोजित तरीके से अलग-अलग दिनों में गैस निकाली गई। पुलिस जांच के अनुसार:

31 मार्च: 2 कैप्सूल, 1 अप्रैल: 1 कैप्सूल, 3 अप्रैल: 1 कैप्सूल, 5 अप्रैल: 2 कैप्सूल इस तरह कुल 6 कैप्सूल से करीब 90 मीट्रिक टन LPG गैस की अवैध निकासी की गई।

रिकॉर्ड में भारी गड़बड़ी

दस्तावेजों की जांच में भी गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। रिकॉर्ड के अनुसार अप्रैल महीने में लगभग 47 टन गैस खरीदी गई थी और शुरुआती स्टॉक शून्य था। इसके बावजूद 107 टन से अधिक गैस की बिक्री दर्ज मिली। खरीद और बिक्री के आंकड़ों में यह बड़ा अंतर अवैध सप्लाई और कालाबाज़ारी की ओर इशारा करता है।

कैसे चलता था पूरा रैकेट?

जांच के दौरान कर्मचारियों ने स्वीकार किया कि कैप्सूल वाहनों से गैस निकालकर प्लांट के बुलेट टैंक में डाली जाती थी। इसके बाद निजी टैंकरों के जरिए गैस अलग-अलग स्थानों तक पहुंचाई जाती थी। रायपुर और आसपास के इलाकों में 4 से 6 टन तक गैस कच्चे चालान के जरिए बिना पक्के बिल के सप्लाई किए जाने की जानकारी सामने आई है।

सुपुर्दनामा सिस्टम पर उठे सवाल

सूत्रों के अनुसार जिन गैस कैप्सूल वाहनों का इस्तेमाल हुआ, वे प्रशासन द्वारा सुरक्षा के लिए सुपुर्दनामा में दिए गए थे। उन्हीं वाहनों का कथित रूप से दुरुपयोग होना निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

गैस संकट के बीच मुनाफाखोरी

जांच में यह भी सामने आया है कि यह पूरा खेल ऐसे समय में किया गया जब गैस की उपलब्धता संवेदनशील थी। आरोपियों ने हालात का फायदा उठाकर अवैध रूप से भारी मुनाफा कमाया। फिलहाल पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि अवैध गैस किन-किन जगहों पर सप्लाई की गई, इस नेटवर्क में और कौन लोग शामिल हैं और क्या इसका कनेक्शन अन्य जिलों तक फैला हुआ है।



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