पब्लिक स्वर,कोरबा। कोरबा के जिला मेडिकल कॉलेज अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। अस्पताल के ड्रेसिंग रूम से सामने आए एक वीडियो ने न सिर्फ मरीजों की सुरक्षा व्यवस्था पर चिंता बढ़ा दी है, बल्कि अस्पताल प्रबंधन की निगरानी और जवाबदेही को लेकर भी बहस छेड़ दी है। वायरल वीडियो में एक मरीज का दोस्त ऑपरेशन के बाद लगे टांकों की ड्रेसिंग करता दिखाई दे रहा है। घटना के बाद अस्पताल प्रबंधन ने जांच शुरू कर दी है।
जानकारी के मुताबिक, सिविल लाइन थाना क्षेत्र के रामपुर निवासी हुकुम कुमार का कुछ दिन पहले मेडिकल कॉलेज अस्पताल में पथरी का ऑपरेशन हुआ था। ऑपरेशन के बाद टांके खुलने और दर्द बढ़ने पर वह अपने दोस्त चंदन कुमार के साथ अस्पताल पहुंचे। दोनों ने पहले पंजीयन करवाया और डॉक्टर को दिखाया। डॉक्टर ने मरीज को ड्रेसिंग कराने की सलाह दी, जिसके बाद वे ड्रेसिंग रूम पहुंचे।
मरीज पक्ष का आरोप है कि ड्रेसिंग रूम में काफी देर तक इंतजार करने के बावजूद कोई कर्मचारी मौजूद नहीं था। दर्द असहनीय होने और मदद नहीं मिलने पर चंदन कुमार ने खुद ही ड्रेसिंग रूम में रखे सामान और दवाइयों की मदद से ऑपरेशन वाली जगह की ड्रेसिंग कर दी। इस दौरान किसी ने उन्हें रोकने की कोशिश नहीं की। पूरे घटनाक्रम का वीडियो किसी ने बना लिया, जो बाद में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
चंदन कुमार का कहना है कि वे स्टाफ को खोजने के लिए पर्ची लेकर कई जगह गए, लेकिन कोई कर्मचारी नहीं मिला। उनका दावा है कि मरीज की हालत देखकर मजबूरी में उन्हें खुद ड्रेसिंग करनी पड़ी।
वहीं अस्पताल प्रबंधन का पक्ष इससे अलग है। मेडिकल कॉलेज अस्पताल के सह अधीक्षक डॉ. रविकांत जाटवर ने बताया कि वायरल वीडियो के आधार पर मामले की जांच की जा रही है। उनके अनुसार, ड्रेसिंग रूम में कर्मचारी मौजूद था और उसने मरीज के दोस्त को खुद ड्रेसिंग करने से मना भी किया था। बावजूद इसके उसने खुद ड्रेसिंग की।
घटना ने अस्पताल की व्यवस्थाओं को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि ड्रेसिंग रूम में कर्मचारी मौजूद था, तो फिर एक सामान्य व्यक्ति को मेडिकल प्रक्रिया करने की अनुमति कैसे मिल गई? वहीं यदि मरीज पक्ष का दावा सही है, तो यह अस्पताल में ड्यूटी मॉनिटरिंग और आपात देखभाल व्यवस्था की बड़ी लापरवाही मानी जाएगी।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, ऑपरेशन के बाद ड्रेसिंग जैसी प्रक्रिया प्रशिक्षित मेडिकल स्टाफ द्वारा ही की जानी चाहिए। असावधानी या संक्रमण की स्थिति में मरीज की हालत गंभीर हो सकती है। ऐसे में अस्पताल परिसर के भीतर किसी गैर-प्रशिक्षित व्यक्ति द्वारा ड्रेसिंग किया जाना सुरक्षा मानकों पर भी सवाल खड़ा करता है।
सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद लोगों में नाराजगी देखी जा रही है। कई लोगों ने सरकारी अस्पतालों में स्टाफ की उपलब्धता, निगरानी व्यवस्था और मरीजों के साथ व्यवहार को लेकर सवाल उठाए हैं। घटना ने यह भी दिखाया कि स्वास्थ्य सेवाओं में छोटी सी लापरवाही किस तरह पूरे सिस्टम की छवि को प्रभावित कर सकती है।
अस्पताल प्रबंधन ने फिलहाल मामले की विस्तृत जांच कराने और दोषी पाए जाने पर कार्रवाई की बात कही है। साथ ही भविष्य में मरीजों को ऐसी स्थिति का सामना न करना पड़े, इसके लिए व्यवस्थाएं मजबूत करने का दावा भी किया गया है।

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