पब्लिक स्वर,मुंगेली। पुलिस परिवारों के बच्चों को पारंपरिक करियर विकल्पों से आगे बढ़ाकर नई संभावनाओं से जोड़ने की दिशा में मुंगेली पुलिस ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। पुलिस परिवार कल्याण योजना के तहत जिले के 23 छात्र-छात्राओं को रायपुर स्थित स्वामी विवेकानंद हवाई अड्डे का शैक्षणिक भ्रमण कराया गया। यह कार्यक्रम केवल एक विजिट तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसे करियर ओरिएंटेशन और व्यावहारिक शिक्षा से जोड़ने का प्रयास किया गया।
इस पहल का उद्देश्य बच्चों को उन क्षेत्रों से परिचित कराना था, जिनके बारे में आमतौर पर छोटे शहरों और पुलिस परिवारों के विद्यार्थियों को सीमित जानकारी मिल पाती है। एयरपोर्ट विजिट के दौरान छात्रों ने विमान संचालन, सुरक्षा प्रोटोकॉल, एयर ट्रैफिक मैनेजमेंट और तकनीकी व्यवस्थाओं को करीब से समझा। इससे उन्हें यह एहसास हुआ कि एविएशन सेक्टर केवल पायलट बनने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें कई तकनीकी और प्रबंधन से जुड़े करियर विकल्प भी मौजूद हैं।
कार्यक्रम की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी भारतीय वायु सेना के फाइटर पायलट विंग कमांडर विवेक कुमार साहू और अन्य अधिकारियों के साथ सीधा संवाद रहा। इस इंटरैक्शन ने छात्रों को करियर की वास्तविकताओं से रूबरू कराया। पायलट बनने की प्रक्रिया, शैक्षणिक योग्यता, शारीरिक मानक और मेडिकल फिटनेस जैसे पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी गई। अधिकारियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए यह भी बताया कि इस क्षेत्र में सफलता के लिए अनुशासन, निरंतर अभ्यास और मानसिक दृढ़ता कितनी जरूरी होती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह के एक्सपोजर विजिट छात्रों के करियर दृष्टिकोण को व्यापक बनाते हैं। नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (NEP) 2020 भी experiential learning और करियर अवेयरनेस पर जोर देती है। ऐसे में मुंगेली पुलिस की यह पहल न केवल कल्याणकारी है, बल्कि शिक्षा के आधुनिक दृष्टिकोण के अनुरूप भी है।
पुलिस विभाग द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम का एक सामाजिक पहलू भी है। पुलिस परिवारों के बच्चों को अक्सर ड्यूटी की प्रकृति के कारण सीमित संसाधनों और अवसरों में पढ़ाई करनी पड़ती है। ऐसे में इस तरह के प्रयास उन्हें आत्मविश्वास देने के साथ-साथ बड़े सपने देखने के लिए प्रेरित करते हैं।
यदि इस मॉडल को नियमित रूप से लागू किया जाए और अन्य जिलों में भी विस्तारित किया जाए, तो यह राज्य स्तर पर एक प्रभावी करियर गाइडेंस मॉडल बन सकता है। फिलहाल, मुंगेली की यह पहल इस बात का उदाहरण है कि संस्थागत प्रयासों से बच्चों के भविष्य की दिशा बदली जा सकती है।

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