पब्लिक स्वर,दंतेवाड़ा। दंतेवाड़ा जिले के डेगलरास और मेटनार के जंगलों से सामने आए कथित जुए के वीडियो ने स्थानीय पुलिस व्यवस्था और निगरानी तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वीडियो में एक सिटी कोतवाली में पदस्थ पुलिसकर्मी और एक बर्खास्त एएसआई के दिखने का दावा किया जा रहा है, जिससे पूरे मामले की संवेदनशीलता और बढ़ गई है।
मिली जानकारी के अनुसार, जंगल के भीतर तिरपाल के नीचे नियमित रूप से जुए का बड़ा फड़ संचालित हो रहा है। यह गतिविधि किसी एक दिन की नहीं, बल्कि रोजाना चलने वाली संगठित व्यवस्था का संकेत देती है। बताया जा रहा है कि हर दिन दोपहर करीब 2 बजे के बाद यह फड़ बैठता है और देर रात तक चलता है, जिसमें लाखों रुपए का दांव लगाया जाता है। अनुमान है कि रोजाना 10 लाख रुपए से अधिक का लेन-देन हो रहा है, जो आगामी दिनों में 40 से 50 लाख रुपए तक पहुंच सकता है।
इस जुए के अड्डे की एक और चिंताजनक बात यह है कि यह सिटी कोतवाली क्षेत्र से काफी नजदीक बताया जा रहा है। इसके बावजूद इतने बड़े स्तर पर अवैध गतिविधि का संचालित होना पुलिस की सतर्कता पर सवाल उठाता है। इस फड़ में सिर्फ स्थानीय ही नहीं, बल्कि पड़ोसी जिलों जैसे सुकमा, बीजापुर और बस्तर के साथ-साथ बचेली और गीदम से भी लोग पहुंच रहे हैं, जो इसके व्यापक नेटवर्क की ओर इशारा करता है।
वीडियो सामने आने के बाद अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक आरके बर्मन ने जांच की बात कही है। उनका कहना है कि मामले की गंभीरता से जांच की जाएगी और दोषी पाए जाने पर किसी को बख्शा नहीं जाएगा। हालांकि, यह बयान उस स्थिति में आया है जब दो दिनों के भीतर दूसरा वीडियो सामने आया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि मामला एकल घटना नहीं बल्कि लगातार चल रही गतिविधि का हिस्सा हो सकता है।
इससे पहले भी जिले में खुलेआम जुआ संचालित होने के मामले सामने आ चुके हैं। जिला मुख्यालय के एकता परिसर में इसी तरह का फड़ चलने की खबरें आई थीं, जिसके बाद पुलिस ने कार्रवाई की थी। कुछ समय के लिए गतिविधि थमी, लेकिन अब वही नेटवर्क जंगलों में शिफ्ट होकर और बड़े पैमाने पर सक्रिय होता दिख रहा है।
दो दिन पहले जब पहला वीडियो सामने आया था, तब पुलिस टीम मौके पर पहुंची थी, लेकिन कार्रवाई से पहले ही जुआरी फरार हो गए थे। मौके से केवल ताश के पत्ते बरामद हुए थे। यह भी संकेत देता है कि जुआरियों को पुलिस की गतिविधियों की पूर्व जानकारी मिल रही हो सकती है।
पूरे घटनाक्रम से यह सवाल उभरता है कि क्या यह सिर्फ कानून-व्यवस्था की चूक है या फिर इसके पीछे कोई संगठित संरक्षण तंत्र काम कर रहा है। वीडियो में पुलिसकर्मियों की मौजूदगी के दावे इस मामले को और गंभीर बनाते हैं, क्योंकि इससे पुलिस की निष्पक्षता और जवाबदेही दोनों पर असर पड़ता है। अब देखना यह होगा कि जांच किस दिशा में जाती है और क्या वास्तव में जिम्मेदार लोगों पर ठोस कार्रवाई होती है, या फिर यह मामला भी समय के साथ ठंडे बस्ते में चला जाता है।

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