पब्लिक स्वर,नई दिल्ली/ मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी गंभीर समस्याओं में से एक एंजाइटी अब सिर्फ मानसिक नहीं, बल्कि शारीरिक रूप से भी असर डालती है। लेकिन हाल ही में आई एक नई रिसर्च में दावा किया गया है कि एंजाइटी को बंद करने वाला "स्विच" हमारे ही दिमाग में मौजूद होता है। यह खोज न केवल साइंस के लिए अहम है, बल्कि एंजाइटी से जूझ रहे करोड़ों लोगों के लिए राहत की खबर बन सकती है।
क्या है एंजाइटी और क्यों है खतरनाक?
एंजाइटी यानी चिंता, घबराहट और डर का असामान्य स्तर। यह व्यक्ति की सोचने, समझने और निर्णय लेने की क्षमता को प्रभावित करती है। इसके शारीरिक लक्षणों में तेजी से दिल धड़कना, पसीना आना, कंपकंपी, नींद की कमी, भूख न लगना और हमेशा बेचैन महसूस करना शामिल हैं।
ब्रेन में मिला एंजाइटी को बंद करने वाला "स्विच"
इस रिसर्च के मुताबिक, मस्तिष्क में मौजूद सेरिबैलम नामक हिस्से में सेरोटोनिन नाम का रासायनिक मैसेंजर पाया जाता है, जो मूड, याददाश्त, नींद और अन्य शारीरिक गतिविधियों को कंट्रोल करता है। अब तक सेरोटोनिन को एंजाइटी को बढ़ाने से जोड़ा जाता था, लेकिन ताजा अध्ययन में यह साफ हुआ है कि सेरिबैलम में सेरोटोनिन का हाई लेवल एंजाइटी को कम कर सकता है।
कैसे हुआ यह शोध?
यह रिसर्च अमेरिका की पेनसिल्वेनिया यूनिवर्सिटी के पेई चिन और टेमासेक लाइफ साइंसेज लैब के जॉर्ज ऑगस्टीन ने की है। उन्होंने चूहों पर यह प्रयोग किया, जिसमें पाया गया कि जिन चूहों के सेरिबैलम में सेरोटोनिन की मात्रा कम थी, उनमें बेहद ज्यादा एंजाइटी के लक्षण दिखे। इसके उलट जिनमें सेरोटोनिन की मात्रा अधिक थी, उनमें घबराहट और बेचैनी बेहद कम पाई गई।
क्या बदल सकता है यह शोध?
शोधकर्ताओं का कहना है कि यह रिसर्च मेंटल हेल्थ डिसऑर्डर के इलाज में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है। भविष्य में सेरोटोनिन और दिमाग के खास हिस्सों को टारगेट करके ऐसी दवाएं बनाई जा सकती हैं, जो एंजाइटी को जड़ से खत्म करने में मदद करेंगी।
एंजाइटी के प्रमुख लक्षण:
बार-बार घबराहट या बेचैनी महसूस होना
नींद नहीं आना या बार-बार टूटना
भूख कम लगना या ज्यादा लगना
दिल की धड़कन तेज होना
मांसपेशियों में खिंचाव, पसीना आना
सोच में उलझाव और फोकस की कमी
सामान्य कार्यों में भी रुचि न होना
चिड़चिड़ापन और अत्यधिक चिंता
कैसे करें शुरुआती बचाव?
रेगुलर एक्सरसाइज करें
मेडिटेशन और ब्रीदिंग एक्सरसाइज अपनाएं
पर्याप्त नींद लें
सोशल एक्टिविटीज में भाग लें
जरूरत हो तो थेरेपिस्ट से सलाह लें
निष्कर्ष:
यह रिसर्च एंजाइटी के इलाज में नई उम्मीद की किरण लेकर आई है। अगर वैज्ञानिक इस दिशा में और गहराई से काम करते हैं, तो निकट भविष्य में मेंटल हेल्थ से जुड़ी समस्याओं का इलाज और ज्यादा सटीक और प्रभावी हो सकता है

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