लोडिंग प्लांट में लापरवाही ने उजाड़ा परिवार,डेढ़ महीने पहले शादी,मालगाड़ी की चपेट में आकर अजय की दर्दनाक मौत

सुरक्षा मानकों की अनदेखी या सिस्टम की विफलता? सवालों के घेरे में निजी कंपनी एनएमडीसी-रेलवे, जवाबदेही का इंतजार



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पब्लिक स्वर,बचेली/दंतेवाड़ा। बैलाड़ीला क्षेत्र में एक बार फिर सुरक्षा में भारी लापरवाही ने एक गरीब परिवार की खुशियां छीन लीं। एनएमडीसी के बचेली लोडिंग प्लांट में 21 अप्रैल रात 2 बजे हुए दर्दनाक हादसे में 25 वर्षीय मजदूर अजय भोगामी की मौत ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया है।


सबसे दर्दनाक पहलू यह है कि अजय की महज डेढ़ महीने पहले ही शादी हुई थी। परिवार अभी नई खुशियों में था, लेकिन इस हादसे ने सब कुछ छीन लिया। पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल है—उसने कहा, “वो काम पर जा रहे हैं कहकर निकले थे, क्या पता था अब कभी वापस नहीं आएंगे…”

सुरक्षा पर बड़े सवाल ?

इस हादसे ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं—
क्या अजय को रैक चेकिंग का उचित प्रशिक्षण दिया गया था?
क्या उन्हें सुरक्षा संबंधी पूरी जानकारी दी गई थी?
क्या मौके पर सुपरविजन की कमी थी?
बताया जा रहा है कि हादसे की जानकारी तब सामने आई जब मालगाड़ी के गार्ड ने वीडियो बनाकर ग्रुप में साझा किया। तब तक काफी देर हो चुकी थी और अजय का अत्यधिक खून बह चुका था।

हादसों से क्यों नहीं लिया जा रहा सबक ?

बारिश से बचने अजय मालगाड़ी के नीचे गया था उसके बाद मालगाड़ी चली और अजय हादसे का शिकार हो गया हादसे में अजय के दोनों पैर कट गए थे और एक हांथ। 

बैलाड़ीला क्षेत्र में लगातार हो रहे हादसे अब एक खतरनाक संकेत बनते जा रहे हैं—
कभी दीवार ढहने से मजदूरों की मौत 
कभी पानी के गड्ढे में डूबने की घटनाएं
प्लांट में कन्वेयर की चपेट में आना
ऊंचाई से गिरकर गंभीर घायल होना ऐसे कई हादसे हुए इन घटनाओं में लगातार इजाफा हो रहा है, लेकिन सवाल यही है—
क्या कंपनियां सुरक्षा को लेकर सच में गंभीर हैं?
या फिर मजदूरों की जान की कीमत सिर्फ कागजों में तय है ?

 
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़

अजय की मौत ने परिवार को पूरी तरह तोड़ दिया है। 

घर में मातम पसरा है, किसी को विश्वास नहीं हो रहा कि अजय अब कभी लौटकर नहीं आएंगे।

जवाबदेही तय होगी या फिर सन्नाटा ?
 
जांच एजेंसी आई जांच कर चले गई हादसे की वजह ना पहले कभी बताई गई ना इस बार। 

हर हादसे के बाद जांच और कार्रवाई की बातें होती हैं, लेकिन जमीनी हकीकत अक्सर अलग होती है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है—
क्या इस बार दोषियों पर कार्रवाई होगी?
क्या पीड़ित परिवार को न्याय और मुआवजा मिलेगा?
या फिर यह मामला भी बाकी हादसों की तरह फाइलों में दब जाएगा?



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