पब्लिक स्वर,महासमुंद। एक तरफ भीषण गर्मी और हीटवेव को देखते हुए शासन ने मवेशियों से काम लेने पर रोक लगाकर संवेदनशीलता दिखाई है, वहीं दूसरी ओर शहर को स्वच्छ रखने वाली सफाई मित्र बहनों की स्थिति कई गंभीर सवाल खड़े कर रही है। 44 से 45 डिग्री तापमान, तेज धूप और गर्म हवाओं के बीच नगर पालिका की महिला सफाई कर्मी रोजाना घंटों तक रिक्शा चलाकर डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन करने को मजबूर हैं।
नगर पालिका के “मिशन क्लीन सिटी” अभियान में कार्यरत करीब 117 सफाई मित्र बहनें सप्ताह में 6 दिन लगातार लगभग 10 घंटे तक काम करती हैं। सुबह साढ़े 6 बजे नगर पालिका पहुंचकर निष्ठा ऐप में उपस्थिति दर्ज कराने के बाद वे शहर के अलग-अलग वार्डों में कचरा संग्रहण के लिए निकलती हैं। महासमुंद के 30 वार्डों में घर-घर जाकर कचरा इकट्ठा करना और उसे शहर से दूर स्थित मणिकंचन केंद्रों तक पहुंचाना उनकी दैनिक जिम्मेदारी का हिस्सा है।
गर्मी में काम नहीं, अग्निपरीक्षा जैसी स्थिति
भीषण गर्मी में उबड़-खाबड़ सड़कों पर रिक्शा चलाना इन महिलाओं के लिए शारीरिक और मानसिक दोनों स्तर पर बेहद कठिन हो चुका है। सफाई मित्रों के अनुसार कई महिलाओं को चक्कर आना, ब्लड प्रेशर बढ़ना, बुखार, डिहाइड्रेशन और अत्यधिक कमजोरी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन काम का दबाव ऐसा है कि उन्हें ड्यूटी जारी रखनी पड़ती है।
महिलाओं का कहना है कि यदि कार्य समय सुबह 6 बजे से दोपहर 12 बजे तक कर दिया जाए तो उन्हें काफी राहत मिल सकती है। उनका तर्क है कि दोपहर बाद की तेज गर्मी में रिक्शा चलाना स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन रहा है। इसके बावजूद अब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया।
सीमित संसाधन, भारी जिम्मेदारी
नगर पालिका द्वारा सफाई कार्य के लिए 21 फुट रिक्शा और 20 ई-रिक्शा उपलब्ध कराए गए हैं। शहर से लगभग 2 किलोमीटर दूर स्थित खरोरा, खैरा, तुमाडबरी और दलदली रोड के 4 मणिकंचन केंद्रों तक कचरा पहुंचाने की जिम्मेदारी भी इन्हीं महिलाओं पर है। यहां गीले और सूखे कचरे की छंटनी का काम भी सफाई मित्र बहनें ही करती हैं।
सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि रिक्शों के रखरखाव और मरम्मत का खर्च भी कई बार इन्हीं कर्मचारियों को उठाना पड़ता है। करीब 8 हजार रुपये मासिक वेतन पाने वाली इन महिलाओं को यदि रिक्शा में कोई बड़ी खराबी आ जाए तो 1 से 2 हजार रुपये तक अपनी जेब से खर्च करना पड़ता है। कम आय और कठिन श्रम के बीच यह अतिरिक्त आर्थिक बोझ उनकी मुश्किलों को और बढ़ा देता है।
सिस्टम पर उठ रहे सवाल
यह मामला अब केवल श्रम का नहीं बल्कि मानवीय संवेदनाओं का मुद्दा बनता जा रहा है। जब हीटवेव के दौरान पशुओं तक से काम लेने पर रोक लगाई जा सकती है, तो शहर की सफाई व्यवस्था संभालने वाली महिलाओं के लिए विशेष राहत व्यवस्था क्यों नहीं?
प्रशासन ने दिया राहत का संकेत
इस पूरे मामले में कलेक्टर विनय कुमार लंगेह ने कहा कि प्रत्येक नगर पालिका की कार्यप्रणाली अलग होती है, लेकिन मीडिया के माध्यम से उन्हें इस स्थिति की जानकारी मिली है। उन्होंने कहा कि सफाई मित्र बहनों को राहत देने के लिए कार्य समय कम करने पर विचार किया जाएगा और भीषण गर्मी में उन्हें राहत पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा। फिलहाल शहर को स्वच्छ रखने वाली ये महिलाएं उम्मीद लगाए बैठी हैं कि सिस्टम उनकी आवाज सुनेगा और तपती गर्मी में उनके श्रम के साथ उनके स्वास्थ्य और सम्मान की भी चिंता करेगा।

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