शहरों से गांवों तक सरकारी जमीनों के उपयोग का मास्टर प्लान तैयार



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पब्लिक स्वर,रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्यभर में वर्षों से अनुपयोगी पड़ी शासकीय जमीनों और जर्जर सरकारी परिसरों के पुनर्विकास (रीडेवलपमेंट) की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। सरकार अब ऐसी खाली जमीनों को केवल सुरक्षित रखने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि उनका योजनाबद्ध तरीके से व्यावसायिक, आवासीय और जनहित के उपयोग में लाने की तैयारी कर रही है। इस महत्वाकांक्षी योजना के जरिए सरकार एक ओर शहरों के सुनियोजित विकास का लक्ष्य साध रही है, वहीं दूसरी ओर शासकीय परिसंपत्तियों से अतिरिक्त राजस्व अर्जित करने की रणनीति पर भी काम कर रही है।

इस परियोजना के लिए आवास एवं पर्यावरण विभाग को नोडल एजेंसी बनाया गया है। बुधवार को मंत्रालय महानदी भवन में मुख्य सचिव विकासशील की अध्यक्षता में आयोजित उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में इस कार्ययोजना के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में विभागीय अधिकारियों और जिला कलेक्टरों से विभिन्न जिलों में चिन्हित सरकारी जमीनों की स्थिति, उपयोगिता और संभावनाओं की जानकारी ली गई।

क्यों जरूरी पड़ी यह योजना?

राज्य के कई शहरों और कस्बों में विभिन्न विभागों, निगम-मंडलों, बोर्डों और कंपनियों की बड़ी मात्रा में जमीनें वर्षों से खाली पड़ी हैं। इनमें से कई जमीनें प्राइम लोकेशन पर स्थित हैं, लेकिन उपयोग नहीं होने के कारण वहां अतिक्रमण का खतरा बना रहता है। कई पुराने सरकारी भवन भी ऐसे हैं, जिनकी मरम्मत पर खर्च करना आर्थिक रूप से व्यावहारिक नहीं माना जा रहा।

मुख्य सचिव विकासशील ने बैठक में स्पष्ट कहा कि अनुपयोगी सरकारी जमीनें वर्तमान में न तो शासन को राजस्व दे रही हैं और न ही जनता को कोई प्रत्यक्ष लाभ पहुंचा रही हैं। ऐसे में इन परिसंपत्तियों का आधुनिक जरूरतों के अनुरूप पुनर्विकास समय की मांग है।

बनेगा डिजिटल लैंड बैंक, GIS मैपिंग से होगी निगरानी

योजना का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा राज्य का एक केंद्रीकृत “डिजिटल लैंड बैंक” तैयार करना है। इसके तहत सभी सरकारी विभागों की खाली जमीनों का ऑनलाइन रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। GIS मैपिंग के माध्यम से हर जमीन की लोकेशन, क्षेत्रफल, वर्तमान स्थिति और स्वामित्व की जानकारी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दर्ज होगी।


शहरों में बनेंगे कॉम्प्लेक्स, आवास और पार्किंग

सरकार की योजना के अनुसार शहरों में स्थित प्राइम सरकारी जमीनों पर बहुउद्देशीय विकास किया जाएगा। इनमें आवासीय योजनाएं, व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स, मल्टीलेवल पार्किंग, नए सरकारी कार्यालय और नागरिक सुविधाओं से जुड़े निर्माण शामिल हो सकते हैं। बड़ी परियोजनाओं के लिए पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल अपनाने की बात भी कही गई है। इससे सरकार को निजी निवेश मिलेगा और परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आने की संभावना है।



ग्रामीण जमीनों के लिए अलग रणनीति

सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों की जमीनों के उपयोग के लिए भी अलग दृष्टिकोण तैयार किया है। गांवों में स्थित अनुपयोगी सरकारी जमीनों पर कृषि आधारित परियोजनाएं, उद्यानिकी केंद्र, आधुनिक वेयरहाउस और स्किल डेवलपमेंट सेंटर विकसित किए जाने का प्रस्ताव है। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ सकते हैं।

जर्जर भवन हटेंगे, आधुनिक ढांचे बनेंगे

बैठक में यह भी तय किया गया कि ऐसे सरकारी भवनों और परिसरों को चिन्हित किया जाएगा, जो पूरी तरह जर्जर हो चुके हैं और जिनकी मरम्मत करना आर्थिक रूप से लाभकारी नहीं है। ऐसी जगहों पर पुराने ढांचों को हटाकर आधुनिक और बहुउपयोगी भवन तैयार किए जाएंगे। सरकार का मानना है कि इससे न केवल प्रशासनिक कार्यक्षमता बढ़ेगी, बल्कि शहरों की सौंदर्यता और बुनियादी ढांचे में भी सुधार होगा।

अतिक्रमण रोकने पर विशेष फोकस

योजना का एक महत्वपूर्ण पहलू सरकारी जमीनों को अतिक्रमण से बचाना भी है। इसके लिए चिन्हित जमीनों की तत्काल फेंसिंग कर वहां शासकीय स्वामित्व के बोर्ड लगाए जाएंगे। साथ ही राजस्व और पुलिस विभाग संयुक्त रूप से निगरानी रखेंगे। राज्य में कई जगहों पर वर्षों से सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जों की शिकायतें सामने आती रही हैं। ऐसे में यह कदम प्रशासनिक नियंत्रण मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।



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