पब्लिक स्वर,बिलासपुर। शहर के वार्ड क्रमांक 62 स्थित शास्त्री नगर के नेपाली मोहल्ले में पिछले 10 दिनों से गहराया पेयजल संकट अब लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर भारी पड़ने लगा है। भीषण गर्मी के बीच क्षेत्र के कई घरों में या तो पानी पहुंच ही नहीं रहा, और जहां पहुंच रहा है वहां मटमैला, बदबूदार और कथित तौर पर ऑयल मिश्रित पानी आने की शिकायत सामने आ रही है। हालात ऐसे हैं कि लोगों को पीने के पानी के लिए तेज धूप में घंटों टैंकर का इंतजार करना पड़ रहा है।
यह पूरा मामला इसलिए भी गंभीर हो गया है क्योंकि शहर में करीब 300 करोड़ रुपए की अमृत मिशन योजना पिछले चार वर्षों से संचालित है। योजना का उद्देश्य शहरवासियों को स्वच्छ और नियमित पेयजल उपलब्ध कराना था, लेकिन जमीनी स्थिति इसके उलट दिखाई दे रही है।
छह बार पाइपलाइन काटी, फिर भी समस्या बरकरार
वार्ड पार्षद सीमा राजेश शुक्ला के अनुसार, बीते 10 दिनों में नगर निगम के जल विभाग ने छह बार पाइपलाइन काटकर अलग-अलग सप्लाई लाइनों से जोड़ने का प्रयास किया। बावजूद इसके कई मोहल्लों में पानी की आपूर्ति पूरी तरह ठप है।
उन्होंने बताया कि बार-बार पाइपलाइन में किए गए बदलावों का सबसे ज्यादा असर अग्रवाल किराना गली में देखने को मिला है, जहां 20 से 25 घरों में पानी की सप्लाई पूरी तरह बंद हो गई है। नेपाली मोहल्ले के पीछे और आसपास के इलाकों में भी लोग पानी के लिए परेशान हैं।
ऑयल मिश्रित पानी की शिकायत से बढ़ी चिंता
स्थिति तब और गंभीर हो गई जब सीपत मेन रोड स्थित भाजपा की पूर्व पार्षद सरोजिनी कुर्मी के घर के आसपास बुधवार सुबह ऑयल मिश्रित पानी आने की शिकायत सामने आई। करीब तीन से चार घरों में ऐसे पानी की सप्लाई होने के बाद जल विभाग ने पानी के सैंपल जांच के लिए भेजे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि नल खोलने पर शुरुआत में गंदा और बदबूदार पानी आता है, कुछ देर बाद साफ पानी दिखता है, लेकिन दोबारा नल चालू करने पर फिर वही मटमैला पानी आने लगता है। इससे लोगों में स्वास्थ्य को लेकर भी डर बढ़ गया है।
पाइपलाइन में खराबी की आशंका
पार्षद सीमा शुक्ला का कहना है कि नूतन चौक की टंकी से सप्लाई होने वाला पानी फिलहाल साफ है और उसकी पाइपलाइन में कोई तकनीकी समस्या नहीं मिली है। वहीं अशोक नगर और मेलापारा टंकी से जुड़ी पाइपलाइन में खराबी की आशंका जताई जा रही है। माना जा रहा है कि कहीं लीकेज या बाहरी प्रदूषण के कारण गंदा पानी सप्लाई लाइन में मिल रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि जिन गलियों में ट्यूबवेल की सप्लाई लाइन जोड़ी गई है, वहां पानी साफ आ रहा है, जबकि बाकी क्षेत्रों में समस्या जस की तस बनी हुई है।
अमृत मिशन की निगरानी और गुणवत्ता पर उठे सवाल
विशेषज्ञों के अनुसार, पानी में ऑयल जैसी परत या बदबू आने के पीछे पाइपलाइन लीकेज, सीवेज लाइन से क्रॉस कनेक्शन, जंग लगी पुरानी पाइपलाइन या लंबे समय तक जलभराव जैसी वजहें हो सकती हैं। यदि समय रहते समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया तो जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि करोड़ों रुपए खर्च होने के बावजूद जल आपूर्ति व्यवस्था की निगरानी कमजोर है। नागरिकों का कहना है कि बार-बार अस्थायी मरम्मत की जा रही है, लेकिन स्थायी समाधान नहीं निकल पा रहा।
गर्मी में सबसे बड़ी चुनौती बना पानी
भीषण गर्मी के दौर में पानी की समस्या ने लोगों की परेशानी कई गुना बढ़ा दी है। महिलाएं और बुजुर्ग पानी भरने के लिए टैंकरों के पीछे लाइन लगाने को मजबूर हैं। कई परिवारों ने पीने के लिए बाजार से पानी खरीदना शुरू कर दिया है। अब लोगों की नजर निगम प्रशासन और जल विभाग की जांच रिपोर्ट पर टिकी है। सवाल यह है कि आखिर 300 करोड़ की योजना के बावजूद शहर के कई इलाकों में लोग स्वच्छ पानी के लिए क्यों संघर्ष कर रहे हैं।

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