पब्लिक स्वर,सरगुजा। आदिम जनजातीय और पहुंचविहीन क्षेत्रों को मुख्यधारा से जोड़ने के उद्देश्य से शुरू की गई केंद्र सरकार की पीएम जन-मन योजना अब सरगुजा जिले के मैनपाट ब्लॉक में सवालों के घेरे में आ गई है। यहां योजना के तहत बनाई जा रही नई सड़कों की गुणवत्ता को लेकर ग्रामीणों में भारी नाराजगी है। आरोप है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद सड़क का डामर हाथ से ही उखड़ रहा है। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद प्रशासन भी हरकत में आ गया है। वही मामले को गंभीरता से लेते हुए सरगुजा कलेक्टर अजीत बसंत ने पीएमजीएसवाई के कार्यपालन अभियंता (ईई) को जांच के निर्देश दिए हैं। वहीं संबंधित सब इंजीनियर को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
दशकों बाद मिली सड़क, लेकिन निर्माण पर उठे सवाल
जानकारी के अनुसार, सरगुजा जिले के कई ऐसे इलाके जो वर्षों से सड़क संपर्क से वंचित थे, उन्हें पीएम जन-मन योजना के तहत सड़क सुविधा से जोड़ने की मंजूरी मिली थी। इनमें मैनपाट ब्लॉक की 14 सड़कें शामिल हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि जिन सड़कों से विकास की उम्मीद थी, वहीं अब घटिया निर्माण की मिसाल बनती दिख रही हैं।
स्थानीय लोगों के मुताबिक सड़क निर्माण में गुणवत्ता मानकों की अनदेखी की गई। डब्ल्यूबीएम (वॉटर बाउंड मैकडम) और जीएसबी (ग्रेन्युलर सब बेस) कार्य ठीक तरीके से नहीं किया गया। सड़क की सतह पर मौजूद धूल और मिट्टी हटाए बिना ही डामरीकरण कर दिया गया, जिससे सड़क की परत टिक नहीं पा रही है।
हाथ से उखड़ रहा डामर, वीडियो वायरल
मैनपाट के कदनई से लोटाभवना तक बनाई गई करीब 2.50 किलोमीटर लंबी सड़क सबसे ज्यादा चर्चा में है। लगभग 1 करोड़ 80 लाख रुपये की लागत से तैयार इस सड़क का वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हुआ है, जिसमें ग्रामीण नई सड़क की डामर परत को हाथों से उखाड़ते नजर आ रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क पर डामर की बेहद पतली लेयर डाली गई है। कई जगह उंगली से खुरचने पर नीचे मिट्टी और डब्ल्यूबीएम की परत दिखाई देने लगती है। आरोप यह भी है कि बारिश के दौरान ही बीटी वर्क (बिटुमिनस ट्रीटमेंट) किया गया, जबकि तकनीकी मानकों के अनुसार गीली सतह पर डामरीकरण टिकाऊ नहीं माना जाता।
“पहली बारिश में बह जाएगी सड़क”
मैनपाट पहाड़ी और अधिक वर्षा वाला क्षेत्र है। ऐसे में ग्रामीणों को आशंका है कि पहली ही बारिश में सड़क उखड़ सकती है। स्थानीय लोगों के अनुसार सड़क की कॉम्पेक्सिंग भी ठीक से नहीं की गई। बिना पर्याप्त रोलिंग और इमल्शन के सीधे डामर बिछा दिया गया।
ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण एजेंसी ने काम जल्द पूरा दिखाने के लिए गुणवत्ता से समझौता किया। इससे सरकारी राशि की बर्बादी के साथ ग्रामीणों की उम्मीदों को भी झटका लगा है।
ठेकेदारी व्यवस्था पर भी सवाल
बताया जा रहा है कि मैनपाट क्षेत्र की पीएम जन-मन योजना की सड़कों का ठेका पत्थलगांव के एक ठेकेदार को मिला था। आरोप है कि मुख्य ठेकेदार ने काम लोकल पेटी कांट्रैक्टरों को सौंप दिया, जिसके बाद निर्माण कार्य में मनमानी शुरू हो गई। ग्रामीणों का कहना है कि विभागीय निगरानी भी प्रभावी नहीं रही, जिसके कारण घटिया निर्माण को नजरअंदाज किया गया। स्थानीय लोगों का दावा है कि केवल एक सड़क ही नहीं, बल्कि योजना के तहत बन रही अधिकांश सड़कों की स्थिति लगभग ऐसी ही है।
प्रशासन ने दिए जांच के निर्देश
मामला सार्वजनिक होने के बाद कलेक्टर अजीत बसंत ने कहा कि सड़क निर्माण में गुणवत्ता से समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने पीएमजीएसवाई के अधिकारियों को जांच के निर्देश दिए हैं और संबंधित सब इंजीनियर को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।कलेक्टर ने स्पष्ट कहा कि जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी और यदि निर्माण में लापरवाही पाई गई तो जिम्मेदारों पर सख्त कदम उठाए जाएंगे।

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