पब्लिक स्वर,राजनांदगांव। स्वास्थ्य विभाग में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) कर्मचारियों को लेकर जारी एक आदेश ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) राजनांदगांव द्वारा जारी निर्देश में केवल एनएचएम कर्मचारियों के लिए आधार आधारित उपस्थिति अनिवार्य किए जाने और उसी के आधार पर वेतन आहरण करने की बात कही गई है। आदेश सामने आने के बाद कर्मचारियों में नाराजगी बढ़ गई है और विभाग पर भेदभावपूर्ण रवैया अपनाने के आरोप लगने लगे हैं।
दरअसल, स्वास्थ्य विभाग में आधार आधारित उपस्थिति प्रणाली लागू करने को लेकर पहले भी निर्देश जारी किए जा चुके हैं। कर्मचारियों का कहना है कि स्वास्थ्य सचिव द्वारा पूर्व में जारी आदेश में विभाग के सभी नियमित और संविदा कर्मचारियों के लिए समान रूप से बायोमेट्रिक अथवा आधार अटेंडेंस व्यवस्था लागू करने की बात कही गई थी। इसके बावजूद राजनांदगांव में केवल एनएचएम कर्मचारियों को इस नियम के दायरे में लाना सवाल खड़े कर रहा है।
एनएचएम कर्मचारियों का आरोप है कि विभाग चयनात्मक तरीके से कार्रवाई कर रहा है। उनका कहना है कि यदि उपस्थिति व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के लिए आधार अटेंडेंस जरूरी है तो इसे सभी कर्मचारियों पर लागू किया जाना चाहिए। केवल संविदा कर्मचारियों पर सख्ती करना अन्यायपूर्ण है। कर्मचारियों के मुताबिक, वे पहले से ही सीमित वेतन और अस्थायी सेवा शर्तों के बीच काम कर रहे हैं, ऐसे में अलग से दबाव बनाना उचित नहीं है।
आदेश के बाद जिले में कार्यरत एनएचएम कर्मचारियों के बीच असंतोष बढ़ गया है। सोशल मीडिया पर भी कर्मचारी खुलकर विरोध जता रहे हैं। कई कर्मचारियों ने विभाग पर दोहरी नीति अपनाने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि नियमित कर्मचारियों को राहत देकर सिर्फ एनएचएम कर्मचारियों पर सख्ती करना प्रशासनिक समानता के सिद्धांत के खिलाफ है।
एनएचएम कर्मचारी संघ के प्रदेश प्रवक्ता पूरन दास ने भी आदेश का विरोध किया है। उन्होंने कहा कि विभागीय नियम सभी कर्मचारियों के लिए समान होने चाहिए। केवल एनएचएम कर्मचारियों को निशाना बनाना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि यह व्यवस्था लागू करनी है तो विभाग के हर अधिकारी और कर्मचारी पर समान रूप से लागू की जाए।
सूत्रों के मुताबिक, इस मुद्दे को लेकर कर्मचारी संगठनों में लगातार चर्चा चल रही है और आने वाले दिनों में संघ की ओर से ज्ञापन सौंपा जा सकता है। कर्मचारियों के बीच आंदोलन को लेकर भी रणनीति बन रही है। यदि विभाग ने आदेश में संशोधन नहीं किया तो विरोध और तेज हो सकता है।
फिलहाल इस पूरे मामले में स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन CMHO के आदेश के बाद यह सवाल जरूर खड़ा हो गया है कि जब नियम पूरे विभाग के लिए तय हैं तो फिर केवल एनएचएम कर्मचारियों पर ही यह सख्ती क्यों दिखाई जा रही है।

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