पब्लिक स्वर,दंतेवाड़ा। डिपाजिट-4 खदान क्षेत्र में प्रस्तावित सड़क निर्माण और खनन गतिविधियों को लेकर विरोध लगातार तेज होता जा रहा है। कुछ दिन पहले जहां सीपीआई नेता मनीष कुंजाम और समाजसेवी सोनी सोढ़ी ने जल, जंगल और जमीन की रक्षा को लेकर खनन का विरोध दर्ज कराया था, वहीं अब क्षेत्र के जनप्रतिनिधि और सरपंच भी खुलकर विरोध में उतर आए हैं।
जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि एनएमडीसी और सीएमडीसी लिमिटेड द्वारा डिपाजिट-4 क्षेत्र में बिना ग्रामसभा, बिना स्थानीय जनप्रतिनिधियों की सहमति और बिना ग्रामीणों को जानकारी दिए सड़क निर्माण कार्य शुरू किया जा रहा है, जो पूरी तरह नियमों के विरुद्ध है।
बताया जा रहा है कि डिपाजिट-4 क्षेत्र में लगभग 646.596 हेक्टेयर भूमि पर खनन की तैयारी की जा रही है। इसी को लेकर जिला पंचायत उपाध्यक्ष अरविंद कुंजाम, बड़े कमेली सरपंच करण तामो, जनपद उपाध्यक्ष रमेश गावड़े, नेरली सरपंच रवि तेलाम, गमावाड़ा सरपंच सुनील भास्कर सुजीत कर्मा सहित अन्य जनप्रतिनिधि और ग्रामीण पहाड़ क्षेत्र में पहुंचे और मौके का निरीक्षण किया।
जनप्रतिनिधियों ने कहा कि एनएमडीसी पिछले 72 वर्षों से क्षेत्र में खनन कर रही है और अब 53 मिलियन टन उत्पादन का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रही है, लेकिन आज भी आसपास के पंचायत क्षेत्रों और गोद ग्रामों में सड़क, बिजली और पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव बना हुआ है। ग्रामीण आज भी प्राकृतिक जल स्रोतों पर निर्भर हैं।
ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि जिस क्षेत्र में खनन की तैयारी की जा रही है, वहां लाखों पेड़, दुर्लभ वन्यजीव और प्राकृतिक जल स्रोत मौजूद हैं। ऐसे में खनन परियोजना से पर्यावरण और आदिवासी जीवन पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।
मौके पर मौजूद जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने एक स्वर में कहा कि जब तक स्थानीय ग्रामीणों के विकास कार्यों का पूरा हिसाब नहीं दिया जाता और ग्रामसभाओं की वास्तविक सहमति नहीं ली जाती, तब तक डिपाजिट-4 में खनन कार्य का विरोध जारी रहेगा। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अब आदिवासी समाज किसी भी “चिकनी-चुपड़ी बातों” में आने वाला नहीं है और जल-जंगल-जमीन की रक्षा के लिए हर स्तर पर संघर्ष किया जाएगा।

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