रिटायर्ड रेलवे कर्मचारी की जमीन पर ठगों का कब्जा, हमशक्ल बनाकर बेच दी जमीन



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पब्लिक स्वर,बिलासपुर। बिलासपुर जिले के सिरगिट्टी क्षेत्र में जमीन हड़पने का एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जिसने रजिस्ट्री प्रक्रिया और राजस्व रिकॉर्ड की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ठगों ने रेलवे से सेवानिवृत्त 74 वर्षीय लोको पायलट की जमीन बेचने के लिए उनका हमशक्ल तैयार किया, फर्जी दस्तावेज बनवाए और जमीन की रजिस्ट्री तक करा दी। पूरे मामले का खुलासा तब हुआ, जब बुजुर्ग ने अपने जमीन के रिकॉर्ड की जांच कराई।

जानकारी के अनुसार, बन्नाकडीह निवासी कलीराम सतनामी रेलवे में लोको पायलट पद से रिटायर हुए हैं। सिरगिट्टी क्षेत्र में उनके नाम पर करीब 12 डिसमिल जमीन दर्ज थी। हाल ही में जब उन्होंने राजस्व अभिलेखों की जांच कराई तो पता चला कि उनकी जमीन का रकबा घटकर 9 डिसमिल रह गया है। रिकॉर्ड में हुई इस कमी ने उन्हें चौंका दिया।

सच्चाई जानने के लिए कलीराम सतनामी रजिस्ट्री कार्यालय पहुंचे, जहां जांच में बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ। आरोप है कि दीपक मिश्रा और रमेश कुमार पांडेय ने सुनियोजित तरीके से एक अज्ञात व्यक्ति को कलीराम सतनामी बनाकर पेश किया। इसी फर्जी व्यक्ति के आधार पर दस्तावेज तैयार कर जमीन की रजिस्ट्री करा दी गई।

जांच में यह भी सामने आया कि आरोपियों ने केवल 65 हजार 500 रुपये में जमीन का सौदा दिखाया। जबकि पीड़ित बुजुर्ग का कहना है कि उन्होंने न तो अपनी जमीन बेची और न ही किसी रजिस्ट्री कार्यालय में जाकर दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए।

मामले की शिकायत एसडीएम कार्यालय में किए जाने के बाद राजस्व विभाग और पटवारी स्तर पर जांच शुरू हुई। जांच में पता चला कि वर्ष 2023-24 के दौरान कलीराम सतनामी की करीब 3 डिसमिल जमीन को रिकॉर्ड में घसारी लक्ष्मी नामक महिला के नाम दर्ज कर दिया गया था। इससे यह आशंका भी गहराई है कि फर्जीवाड़ा केवल रजिस्ट्री तक सीमित नहीं था, बल्कि राजस्व रिकॉर्ड में भी हेरफेर किया गया।

शिकायत के आधार पर सिरगिट्टी पुलिस ने आरोपी दीपक मिश्रा और रमेश कुमार पांडेय के खिलाफ धोखाधड़ी, कूटरचना और अन्य संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस अब उस फर्जी “कलीराम” की तलाश कर रही है, जिसे रजिस्ट्री प्रक्रिया के दौरान असली जमीन मालिक बताकर पेश किया गया था।

रजिस्ट्री सिस्टम पर उठे सवाल

इस मामले ने रजिस्ट्री कार्यालय और राजस्व विभाग की सत्यापन प्रक्रिया पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक 74 वर्षीय बुजुर्ग की पहचान का इस्तेमाल कर फर्जी व्यक्ति के जरिए जमीन की रजिस्ट्री होना यह दिखाता है कि दस्तावेजों और पहचान की जांच में कहीं न कहीं बड़ी लापरवाही हुई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि जमीन संबंधी मामलों में अब केवल कागजी दस्तावेजों पर निर्भर रहने के बजाय बायोमेट्रिक सत्यापन और डिजिटल रिकॉर्ड की अनिवार्यता बढ़ाने की जरूरत है, ताकि इस तरह की धोखाधड़ी रोकी जा सके।



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