पब्लिक स्वर,रायगढ़। छत्तीसगढ़ के ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व वाले सिंघनपुर गुफा क्षेत्र में शनिवार को एक बड़ा हादसा हो गया। शैल चित्रों पर अध्ययन और शोध कार्य करने पहुंची रायपुर की विभिन्न यूनिवर्सिटी की टीम पर अचानक मधुमक्खियों के विशाल झुंड ने हमला कर दिया। इस घटना में एक वैज्ञानिक, चार शोधकर्ता और वन विभाग के दो कर्मचारी गंभीर रूप से घायल हो गए। सभी घायलों को डायल 108 और वन विभाग की मदद से पहाड़ी से नीचे उतारकर अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज जारी है।
जिला मुख्यालय से लगभग 18 किलोमीटर दूर स्थित सिंघनपुर गुफा अपनी प्राचीन शैल चित्रों और पुरातात्विक विरासत के लिए देशभर में प्रसिद्ध है। यहां अक्सर शोधकर्ता, इतिहासकार और पुरातत्व विशेषज्ञ अध्ययन के लिए पहुंचते हैं। शनिवार को रायपुर की अलग-अलग यूनिवर्सिटी से पांच सदस्यीय रिसर्च टीम सिंघनपुर पहुंची थी। टीम में एक वरिष्ठ वैज्ञानिक और चार शोधकर्ता शामिल थे।
जानकारी के अनुसार, वन विभाग के कर्मचारियों के साथ रिसर्च टीम पहाड़ियों पर चढ़कर शैल चित्रों का निरीक्षण कर रही थी। इसी दौरान अचानक मधुमक्खियों के बड़े झुंड ने हमला कर दिया। हमला इतना तेज था कि मौके पर अफरा-तफरी मच गई और सभी लोग अपनी जान बचाने के लिए अलग-अलग दिशाओं में भागने लगे। मधुमक्खियों के हमले में वैज्ञानिक स्मृद्धि (69), शोधकर्ता ब्रम्हानंद धृतलहरे (27), भाग्यश्री (30), सुमन (35), निहारिका (36) घायल हो गए। इनके अलावा वन विभाग के रामझरना प्रभारी गितेश्वर पटेल और चौकीदार ईश्वर यादव भी हमले की चपेट में आ गए।
घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग की अतिरिक्त टीम मौके पर पहुंची। पहाड़ी और जंगल वाले कठिन रास्ते के कारण राहत कार्य चुनौतीपूर्ण रहा। वनकर्मियों और डायल 108 की टीम ने स्ट्रेचर के जरिए घायलों को पहाड़ी से नीचे उतारा और तत्काल निजी अस्पताल में भर्ती कराया।
सिंघनपुर गुफा: इतिहास और शोध का महत्वपूर्ण केंद्र
सिंघनपुर गुफाएं छत्तीसगढ़ की सबसे महत्वपूर्ण प्रागैतिहासिक धरोहरों में गिनी जाती हैं। यहां मौजूद शैल चित्र हजारों साल पुराने माने जाते हैं, जिनमें आदिम मानव जीवन, शिकार और सामाजिक गतिविधियों के चित्र अंकित हैं। यही वजह है कि यह स्थल इतिहासकारों, पुरातत्वविदों और शोधकर्ताओं के लिए अध्ययन का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।

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