पब्लिक स्वर,रायपुर। छत्तीसगढ़ के उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व (USTR) से वन्यजीव संरक्षण और जैव विविधता के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि सामने आई है। वन विभाग के अधिकारियों ने रिजर्व क्षेत्र में दुर्लभ और लुप्तप्राय हिमालयी त्रिकारिनेट पहाड़ी कछुए (Himalayan Tricarinate Hill Turtle) की उपस्थिति दर्ज की है। सामान्यतः हिमालयी और उप-हिमालयी क्षेत्रों में पाए जाने वाले इस कछुए का मध्य भारत के जंगलों में मिलना वैज्ञानिकों और वन्यजीव विशेषज्ञों के लिए आश्चर्यजनक होने के साथ-साथ अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
जैव विविधता का मजबूत संकेत
विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी वन क्षेत्र में दुर्लभ प्रजातियों की मौजूदगी उस क्षेत्र के पारिस्थितिक स्वास्थ्य का महत्वपूर्ण संकेत होती है। हिमालयी त्रिकारिनेट पहाड़ी कछुए की उपस्थिति यह दर्शाती है कि उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व का प्राकृतिक वातावरण अभी भी कई संवेदनशील और कम दिखाई देने वाली प्रजातियों के लिए अनुकूल बना हुआ है।
कहां पाया जाता है यह दुर्लभ कछुआ?
हिमालयी त्रिकारिनेट पहाड़ी कछुआ मुख्य रूप से पूर्वोत्तर भारत, नेपाल, भूटान और बांग्लादेश के उप-हिमालयी क्षेत्रों में पाया जाता है। यह प्रजाति आमतौर पर आर्द्र, घने और पर्णपाती वनों में निवास करती है। इसकी जीवनशैली काफी गुप्त होती है, जिसके कारण इसे देख पाना आसान नहीं होता।
वैज्ञानिक अध्ययन के लिए खुलेंगे नए रास्ते
मध्य भारत के वन क्षेत्र में इस प्रजाति की मौजूदगी कई नए वैज्ञानिक सवाल भी खड़े करती है। वन्यजीव शोधकर्ताओं का मानना है कि इस खोज से प्रजाति के वितरण क्षेत्र, प्रवास पैटर्न और अनुकूलन क्षमता को लेकर नए अध्ययन की संभावनाएं बढ़ेंगी। यह भी संभव है कि उदंती-सीतानदी का वन क्षेत्र इस प्रजाति के लिए लंबे समय से उपयुक्त आवास रहा हो, लेकिन सीमित सर्वेक्षण और इसकी छिपी हुई प्रकृति के कारण इसकी उपस्थिति अब तक दर्ज नहीं हो पाई हो।
संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण संकेत
वन विभाग के लिए यह खोज केवल एक प्रजाति की पहचान भर नहीं है, बल्कि संरक्षण रणनीतियों को और मजबूत करने का अवसर भी है। विशेषज्ञों का मानना है कि दुर्लभ कछुओं और अन्य छोटे वन्यजीवों के संरक्षण के लिए आवास संरक्षण, नियमित मॉनिटरिंग और वैज्ञानिक अध्ययन को बढ़ावा देना आवश्यक होगा। उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व पहले से ही वन भैंसा संरक्षण के लिए राष्ट्रीय स्तर पर पहचान रखता है। अब हिमालयी त्रिकारिनेट पहाड़ी कछुए की मौजूदगी ने इस संरक्षित क्षेत्र की जैविक समृद्धि को एक नया आयाम दे दिया है।

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