पब्लिक स्वर,बलौदाबाजार। स्पीड पोस्ट सेवा में देरी के कारण संविदा नौकरी के लिए भेजे गए आवेदन समय पर नहीं पहुंचने से एक युवती को रोजगार का अवसर गंवाना पड़ा। मामले की सुनवाई के बाद जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, बलौदाबाजार ने डाक विभाग को सेवा में कमी का दोषी मानते हुए आवेदिका को मानसिक और आर्थिक क्षति के लिए मुआवजा देने का आदेश दिया है।
समय पर नहीं पहुंचे तीनों आवेदन
जानकारी के अनुसार, लवन निवासी पूनम चौहान ने स्वास्थ्य विभाग में संविदा नियुक्ति के लिए तीन अलग-अलग पदों पर आवेदन किया था। उन्होंने 12 मार्च 2025 को लवन डाकघर से स्पीड पोस्ट के माध्यम से अपने आवेदन मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ), बलौदाबाजार-भाटापारा कार्यालय भेजे थे।
इन आवेदनों को जमा करने की अंतिम तिथि 17 मई 2025 निर्धारित थी। हालांकि, डाक विभाग निर्धारित समय के भीतर आवेदन पत्र संबंधित कार्यालय तक नहीं पहुंचा सका। परिणामस्वरूप आवेदन 19 मई 2025 को पहुंचे, जब भर्ती प्रक्रिया की अंतिम तिथि समाप्त हो चुकी थी। इसके चलते सीएमएचओ कार्यालय ने बंद लिफाफों को स्वीकार करने से इंकार कर दिया और आवेदन वापस भेज दिए।
रोजगार का अवसर छूटने का दावा
पूनम चौहान का कहना था कि डाक विभाग की लापरवाही के कारण वह भर्ती प्रक्रिया में शामिल नहीं हो सकीं और संविदा पद पर चयन का अवसर खो बैठीं। इस घटना से उन्हें मानसिक तनाव और आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ा। इसके बाद उन्होंने डाक विभाग के खिलाफ जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, बलौदाबाजार में परिवाद दायर कर क्षतिपूर्ति की मांग की।
आयोग ने माना सेवा में कमी
मामले की सुनवाई आयोग की अध्यक्ष रंजना दत्ता तथा सदस्य हरजीत सिंह चावला और शारदा सोनी की पीठ ने की। आयोग ने दोनों पक्षों के दस्तावेजों, तर्कों और संबंधित नियमों का परीक्षण करने के बाद पाया कि डाक विभाग द्वारा बताए गए कारण आवेदन पत्रों की देरी को उचित नहीं ठहराते। आयोग ने अपने आदेश में कहा कि डाक विभाग समय पर डाक पहुंचाने के लिए उपलब्ध संसाधनों और व्यवस्थाओं का समुचित उपयोग नहीं कर सका, जिससे सेवा में कमी स्पष्ट रूप से प्रमाणित होती है।
डाक विभाग पर मुआवजे का आदेश
आयोग ने उप डाकपाल, लवन और मुख्य पोस्ट मास्टर जनरल, रायपुर को आंशिक रूप से जिम्मेदार ठहराते हुए आवेदिका को निम्नानुसार राशि देने का आदेश दिया—
123 रुपये – स्पीड पोस्ट शुल्क की वापसी, 10,000 रुपये – मानसिक एवं आर्थिक क्षतिपूर्ति, 3,000 रुपये – वाद व्यय इस तरह कुल 13,123 रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया गया है।

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