पब्लिक स्वर,नवापारा/रायपुर। अभनपुर विकासखंड के नवापारा तहसील अंतर्गत ग्राम चिपरीडीह से इंसानियत को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। आरोप है कि 50 हज़ार रुपए की मांग पूरी नहीं होने पर एक गरीब परिवार के निर्माणाधीन प्रधानमंत्री आवास को प्रशासन ने जमींदोज कर दिया। अब 10 लोगों का परिवार खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर है और टूटे घर के सामने बिलख रहा है।
परिवार की वर्षों पुरानी तस्वीर दिखाई तो छलके आंसू
गांव के निवासी केवल साहू ने जब कहानी बयां की और वर्षों पुराने अपने घर की तस्वीर दिखाई तब वो पल और भी भावुक हो गया। आरोप है कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से उसी जगह पर निवास कर रहा था, जहां पूरे गांव के कई परिवार वर्षों से बसे हुए हैं। शासन की प्रक्रिया और सत्यापन के बाद उसे प्रधानमंत्री आवास योजना की पहली किश्त 40 हज़ार रुपए भी जारी हुई, जिसके बाद उसने कर्ज लेकर मकान निर्माण शुरू किया।
गांव की राजनीति इंसानियत पर पड़ी भारी
लेकिन ग्राम पंचायत चुनाव के बाद हालात बदल गए। केवल साहू का आरोप है कि गांव की सरपंच ऊषा साहू, पति विमल साहू और नायब तहसीलदार लवन मंडल ने मिलकर उसे परेशान करना शुरू कर दिया। परिवार का आरोप है कि उनसे 50 हज़ार रुपए मांगे गए। रकम नहीं देने पर उनका निर्माणाधीन प्रधानमंत्री आवास तुड़वा दिया गया।
अगर उस जगह पर नहीं बन सकता था प्रधानमंत्री आवास तो फिर पहली किश्त कैसे हुई जारी
सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हो रहा है कि अगर उक्त जमीन पर मकान बनाना अवैध था, तो फिर प्रशासनिक सत्यापन के बाद प्रधानमंत्री आवास योजना की राशि जारी कैसे हुई? आखिर गरीब परिवार को पहले योजना का लाभ देकर फिर उसका आशियाना क्यों उजाड़ दिया गया?
लाखों के कर्ज में डूबा केवल का परिवार
केवल साहू ने बताया कि मकान निर्माण के लिए उसने करीब 6 लाख रुपए का कर्ज लिया था। अब घर टूटने के बाद पूरा परिवार सड़क पर आ गया है। घर के सामने खटिया डालकर 10 सदस्य किसी तरह रात गुजार रहे हैं। महिलाओं और बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल है।
केवल ने किया खुदकुशी का प्रयास
नायब तहसीलदार लवण मंडन, सरपंच और उसके पति की प्रताड़ना और निर्माणाधीन घर को तोड़ दिए जाने से केवल हताश और परेशान हो गया था और हताशा में उसने ग्राम पंचायत भवन के सामने फांसी लगाकर जान देने की कोशिश भी की परन्तु ग्रामवासियों ने उसे बचा लिया।
क्या कहते हैं जिम्मेदार
इस संबंध में तहसीलदार विक्रांत सिंह राठौर ने कहा यह नायब तहसीलदार लवण मंडन के कार्यक्षेत्र में आता है वे ही बता सकेंगे।
एसडीएम रवि सिंह ने बताया इस संबंध में मुझे नायब तहसीलदार ने यह नहीं बताया कि उक्त निर्माणाधीन मकान प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत स्वीकृत हुआ है, और तोड़ते समय कोई जानकारी भी नहीं दी गई।
नायब तहसीलदार लवण मंडन का मोबाइल आउट ऑफ रीच बता रहा था इस कारण उनसे संपर्क नहीं हो पाया।
पीड़ित परिवार ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और गृहमंत्री विजय शर्मा से न्याय की गुहार लगाते हुए सरपंच, नायब तहसीलदार और जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई तथा क्षतिपूर्ति की मांग की है।
अब बड़ा सवाल यही है कि क्या गरीब का आशियाना उजाड़ने वालों पर कार्रवाई होगी या फिर सत्ता और सिस्टम के दम पर मामला दबा दिया जाएगा?

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