पब्लिक स्वर,बिलासपुर। बिलासपुर जिले के बेलगहना चौकी क्षेत्र से इंसानियत को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। लमरीडबरी गांव में एक नवजात बच्ची को जन्म के बाद जिंदा तालाब में फेंक दिया गया, जिससे उसकी दर्दनाक मौत हो गई। शुरुआती तौर पर संदिग्ध परिस्थितियों में मिले शव की जांच जब आगे बढ़ी, तो पोस्टमार्टम और एफएसएल रिपोर्ट ने पूरे मामले की भयावह सच्चाई उजागर कर दी।
तालाब में तैरता मिला था नवजात का शव
पुलिस के मुताबिक दोपहर के समय गांव की महिला बृजबाई ने कोटवार निर्मलदास मानिकपुरी को सूचना दी कि रामसागर तालाब में किसी बच्चे का शव तैर रहा है। सूचना मिलने के बाद कोटवार मौके पर पहुंचा, जहां तालाब के दक्षिणी हिस्से में एक नवजात बच्ची का शव औंधे मुंह पानी में तैरता मिला। शव को बाहर निकालने पर अनुमान लगाया गया कि बच्ची की उम्र महज एक से दो दिन रही होगी। घटना की जानकारी मिलते ही बेलगहना चौकी पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
पोस्टमार्टम और एफएसएल रिपोर्ट में हुआ सनसनीखेज खुलासा
मामले में पुलिस ने मर्ग कायम कर विस्तृत जांच शुरू की। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) की जांच में यह स्पष्ट हुआ कि बच्ची की मौत सामान्य या प्राकृतिक नहीं थी। जांच में सामने आया कि नवजात को जिंदा हालत में तालाब में फेंका गया था। पानी में डूबने और दम घुटने की वजह से उसकी मौत हुई। इस खुलासे के बाद पुलिस ने मामले को हत्या मानते हुए अज्ञात आरोपी के खिलाफ अपराध दर्ज कर लिया है।
लोक-लाज के डर में हत्या की आशंका
प्रारंभिक जांच में पुलिस को आशंका है कि किसी ने सामाजिक बदनामी या लोक-लाज के डर से बच्ची के जन्म को छिपाने के लिए यह खौफनाक कदम उठाया। ग्रामीण इलाकों में अवांछित गर्भ, सामाजिक दबाव और पारिवारिक भय जैसी परिस्थितियां कई बार ऐसे अपराधों की वजह बनती हैं। हालांकि पुलिस फिलहाल हर एंगल से जांच कर रही है और बच्ची की पहचान के साथ-साथ उसके माता-पिता तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है।
गांव-गांव खंगाल रही पुलिस
जांच के तहत पुलिस मार्च के अंतिम सप्ताह में आसपास के गांवों और स्वास्थ्य केंद्रों में हुई डिलीवरी का रिकॉर्ड खंगाल रही है। मितानिनों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और कोटवारों से जानकारी जुटाई जा रही है ताकि उस महिला तक पहुंचा जा सके जिसने हाल ही में बच्ची को जन्म दिया हो। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच तेज कर दी गई है और जल्द आरोपियों तक पहुंचने की उम्मीद है।
समाज के सामने बड़ा सवाल
यह घटना सिर्फ एक आपराधिक मामला नहीं, बल्कि समाज के सामने खड़ा एक बड़ा सवाल भी है। एक नवजात, जिसने दुनिया में आंखें भी ठीक से नहीं खोली थीं, उसे जीने का अधिकार तक नहीं मिला। सवाल यह है कि आखिर आज भी ऐसी कौन-सी सामाजिक परिस्थितियां हैं, जो किसी को इतनी क्रूरता पर मजबूर कर देती हैं।

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